भागलपुर के किसान पारंपरिक खेती छोड़ कर रहे हैं स्ट्रॉबेरी की बंपर कमाई

MyBhagalpur Team7 September 20262 min read18 viewsDevelopment and good news
भागलपुर के किसान पारंपरिक खेती छोड़ कर रहे हैं स्ट्रॉबेरी की बंपर कमाई

भागलपुर के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब यहाँ के किसान पारंपरिक खेती छोड़कर ज्यादा मुनाफा देने वाली स्ट्रॉเบरी की खेती की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। इस खबर में जानिए स्ट्रॉबेरी की खेती से जुड़ी सभी खास बातें।

  • भागलपुर के किसान पारंपरिक खेती से स्ट्रॉबेरी की खेती पर शिफ्ट हो रहे हैं।
  • इटली की 'विंटर डॉन' किस्म यहाँ की जलवायु के लिए सबसे अच्छी है।
  • बिहार स्ट्रॉबेरी विकास योजना 2026 के तहत प्रति हेक्टेयर 3.02 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिल रही है।
  • डीबीटी पोर्टल पर पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर आवेदन करना होगा।

स्थानीय जलवायु के लिए बेस्ट है 'विंटर डॉन' किस्म

भागलपुर और बिहार के किसानों के लिए स्थानीय बागवानी विशेषज्ञ गुंजेश गुंजन, जो 15 साल से खेती कर रहे हैं, उन्होंने बताया कि इटली की 'विंटर डॉन' किस्म यहाँ की जलवायु के लिए बहुत अच्छी है। महाराष्ट्र से आने वाले इस पौधे की कीमत करीब 14 रुपये होती है, लेकिन अब यह भागलपुर में स्थानीय स्तर पर 10 रुपये प्रति पौधा मिल रहा है। इसका फल मार्च के अंत तक पैदावार देता है।
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बिहार सरकार की स्ट्रॉबेरी विकास योजना

इस बदलाव को बिहार स्ट्रॉबेरी विकास योजना 2026 का पूरा समर्थन मिल रहा है। इसके तहत स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 3.02 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। इस सरकारी योजना के तहत खेती के खर्च पर 40 प्रतिशत की सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री पर भी सब्सिडी है जिसमें कार्टन बॉक्स के लिए 5.80 रुपये प्रति पीस और छोटे प्लास्टिक डिब्बों के लिए 1.16 रुपये प्रति पीस शामिल है। यह योजना भागलपुर सहित 12 जिलों में स्ट्रॉबेरी की खेती का विस्तार कर रही है।

आरक्षण और महिलाओं की भागीदारी

लाभार्थियों का चयन एक आरक्षण ढांचे के आधार पर किया जाता है जिसमें सामान्य वर्ग के लिए 78.537 प्रतिशत, अनुसूचित जातियों के लिए 20 प्रतिशत, और अनुसूचित जनजातियों के लिए 1.463 प्रतिशत शामिल है। इसमें 30 प्रतिशत महिला भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश भी है।

तकनीकी मार्गदर्शन और किसानों की सफलता

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के तकनीकी मार्गदर्शन के अलावा, उस्मानपुर के स्थानीय किसान खagesh Mandal ने भी सफल स्ट्रॉबेरी खेती की तकनीक दिखाई है। सरकार किसानों को प्रोत्साहित करती है कि वे रोपण, सिंचाई, मल्चिंग और विपणन चरणों का लाभ उठाने के लिए आधिकारिक डीबीटी पोर्टल के माध्यम से पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर आवेदन करें।

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