भागलपुर में जरदालू और कतरनी आम के बाद अब किसानों ने स्ट्रॉबेरी की खेती करनी शुरू कर दी है। जिले के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 30 एकड़ जमीन पर स्ट्रॉबेरी उगाई जा रही है जिससे किसानों को बहुत अच्छा फायदा मिल रहा है। इस खेती में फायदा तो बहुत है लेकिन जानकारों का कहना है कि इसमें जोखिम भी है और नुकसान से बचने के लिए खास तकनीकी जानकारी होना जरूरी है। बड़े पैमाने पर स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसान गुंजेश गुंजन ने बताया कि पहले बिहार में यह खेती मुश्किल मानी जाती थी लेकिन सही तरीके अपनाने से अच्छे नतीजे मिले हैं। गुंजेश ने बताया कि बलुई दोमट मिट्टी इसके उत्पादन के लिए सबसे अच्छी होती है।
सफल खेती के लिए ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग विधि का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। मल्चिंग के लिए किसानों को पुआल की जगह पॉलिथीन का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है ताकि घास-फूस न उगे। इसके अलावा पौधे लगाने से पहले मिट्टी को बिल्कुल बारीक और भुरभुरा तैयार करना होता है।
स्ट्रॉबेरी उगाने वाले किसानों के लिए बाजार मिलना सबसे बड़ी चुनौती है। गुंजेश चेतावनी देते हैं कि किसानों को तभी खेती करनी चाहिए जब स्थानीय बाजार पास में हो या उन्होंने खरीदार ढूंढने के लिए पहले से बाजार की पूरी जानकारी ले ली हो। हालांकि बिहार में पहले स्ट्रॉबेरी बेचना मुश्किल था लेकिन अब आसानी हो गई है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी फसल बेचने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें।
इस क्षेत्र में खेती से जुड़ी एक और खबर के अनुसार, एक सेवानिवृत्त इंजीनियर अनिल ने एक गाय से शुरुआत करके अब 40 गायों का प्रबंधन किया है। वे अब हर दिन 150 लीटर दूध बेचते हैं।