भागलपुर की बेटियों ने पगडंडी पर दौड़कर लहराया परचम, GST और ITBP में पाई सरकारी नौकरी

Hariom Mishra8 March 20262 min read9 viewsBihar
भागलपुर की बेटियों ने पगडंडी पर दौड़कर लहराया परचम, GST और ITBP में पाई सरकारी नौकरी

भागलपुर के नाथनगर और नवगछिया जैसे इलाकों की बेटियों ने अपनी मेहनत के दम पर एक बड़ी मिसाल कायम की है। सुविधाओं के अभाव में गांव की पगडंडियों पर दौड़कर अभ्यास करने वाली इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। इनमें से लगभग 15 महिला खिलाड़ियों ने खेल कोटे के तहत सरकारी नौकरी हासिल की है। समाज की पुरानी सोच और आर्थिक तंगी को पीछे छोड़ते हुए ये बेटियां अब देश के प्रतिष्ठित विभागों में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

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कौन हैं वो खिलाड़ी जिन्होंने पाया ऊंचा मुकाम?

इस सफलता की कहानी में सबसे प्रमुख नाम मोनिका शाह का है जो डिमहा गांव की रहने वाली हैं। उनके माता-पिता मजदूरी करते हैं, लेकिन मोनिका ने हार नहीं मानी और खो-खो वर्ल्ड कप में भारतीय टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्हें हैदराबाद में जीएसटी हेडक्वार्टर में टैक्स असिस्टेंट के पद पर नियुक्ति मिली है। इसके अलावा बरारी की गुंजन कुमारी ने भी कई मेडल जीते हैं और अब वह चंडीगढ़ में आईटीबीपी (ITBP) में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

इनके अलावा अन्य खिलाड़ियों ने भी सुरक्षा बलों और पुलिस विभाग में अपनी जगह बनाई है:

  • भारती और ममता: बिहार मिलिट्री पुलिस (BMP) में सेवारत।
  • सपना: मद्य निषेध विभाग में सब-इंस्पेक्टर।
  • कोमल: सीमा सुरक्षा बल (BSF) में तैनात।
  • अभिलाषा: बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर।
  • काजल: होमगार्ड के पद पर कार्यरत।

‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना का क्या है असर?

बिहार सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत इन खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी मिली है। इस नीति के अनुसार, जो खिलाड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतते हैं, उन्हें बिना किसी लंबी परीक्षा प्रक्रिया के सीधे ग्रेड-ए या अन्य सरकारी पदों पर नियुक्त किया जाता है। हाल ही में राज्य सरकार ने 800 से अधिक खिलाड़ियों को सम्मानित किया और करोड़ों रुपये की राशि इनाम के तौर पर बांटी है।

इन नियुक्तियों ने ग्रामीण इलाकों में खेल के प्रति लोगों का नजरिया बदल दिया है। पहले जहां लड़कियों को खेलकूद से दूर रहने की सलाह दी जाती थी, वहीं अब माता-पिता खुद अपनी बेटियों को स्टेडियम और ग्राउंड भेज रहे हैं। नाथनगर और नवगछिया के इन खिलाड़ियों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसला हो तो संसाधनों की कमी रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती।

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