भागलपुर में 10 फरवरी से सबको खानी होगी मुफ्त दवा, फाइलेरिया को जड़ से मिटाने का प्लान तैयार

Pooja Kanjani6 February 20262 min read60 viewsHealth
भागलपुर में 10 फरवरी से सबको खानी होगी मुफ्त दवा, फाइलेरिया को जड़ से मिटाने का प्लान तैयार

भागलपुर के समीक्षा भवन में शुक्रवार को डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इसमें जिले में फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी को खत्म करने के लिए खास प्लान तैयार किया गया है। आगामी 10 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक पूरे जिले में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत लोगों को मुफ्त में दवा खिलाई जाएगी ताकि 2030 तक इस बीमारी को पूरी तरह खत्म किया जा सके। डीएम ने साफ कहा है कि यह एक संक्रामक बीमारी है, इसलिए समाज के हर व्यक्ति को दवा खानी होगी।

दवा की मात्रा और उम्र के हिसाब से डोज

इस अभियान में दो तरह की गोलियां दी जाएंगी, जिनका नाम डीईसी (DEC) और एल्बेंडाजोल है। स्वास्थ्य विभाग ने उम्र के हिसाब से दवा की मात्रा तय की है, जिसे ध्यान से समझना जरूरी है।

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  • 2 से 5 वर्ष के बच्चे: डीईसी की 1 गोली और एल्बेंडाजोल की 1 गोली।
  • 6 से 14 वर्ष के बच्चे: डीईसी की 2 गोली और एल्बेंडाजोल की 1 गोली।
  • 15 वर्ष से ऊपर के लोग: डीईसी की 3 गोली और एल्बेंडाजोल की 1 गोली।

यह दवा पूरी तरह से नि:शुल्क है और इसे आशा कार्यकर्ता या स्वास्थ्य कर्मी के सामने ही खाना होगा।

दवा खाने के नियम और सावधानियां

बैठक में डीएम ने विशेष निर्देश दिया है कि यह दवा कभी भी खाली पेट नहीं खानी है। कुछ खाने के बाद ही इसका सेवन करना है। अक्सर लोग खाली पेट दवा खा लेते हैं जिससे परेशानी हो सकती है, इसलिए अभियान के दौरान सुबह कुछ खाकर तैयार रहें।

कुछ विशेष लोगों को यह दवा नहीं दी जाएगी:

  • 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे।
  • गर्भवती महिलाएं।
  • गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति।

दवा खाने के बाद अगर किसी को मामूली चक्कर या जी मिचलाने जैसा लगता है, तो घबराने की बात नहीं है। इसका मतलब है कि दवा असर कर रही है और शरीर में मौजूद फाइलेरिया के कीड़े मर रहे हैं।

घर-घर जाकर खिलाई जाएगी दवा

अभियान को सफल बनाने के लिए 11 फरवरी 2026 को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक ‘मेगा कैंप’ लगाया जाएगा। इस दिन जीविका दीदी और आंगनबाड़ी से जुड़ी महिलाओं को दवा दी जाएगी। इसके अलावा बाकी दिनों में स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाएगी।

इस काम में आशा, आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, एएनएम (ANM) और स्कूलों के शिक्षकों की मदद ली जाएगी। स्कूलों में बच्चों को भी यह दवा खिलाई जाएगी। प्रशासन का जोर है कि कोई भी व्यक्ति इस डोज से छूटना नहीं चाहिए क्योंकि यह बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान में मच्छर के जरिए फैलती है।

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