भागलपुर में बाढ़ का कहर, डूबे 178 गांव और सौ साल पुराना मंदिर टूटा

MyBhagalpur Team8 September 20262 min read28 viewsBihar
भागलपुर में बाढ़ का कहर, डूबे 178 गांव और सौ साल पुराना मंदिर टूटा

भागलपुर में गंगा और कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का संकट गहरा गया है। 56 पंचायतों के 178 गांव और 347 वार्ड बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। 7 सितंबर 2026 तक भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर 34.46 मीटर तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान 33.68 मीटर से 78 सेंटीमीटर ऊपर और उच्चतम बाढ़ स्तर 34.86 मीटर से सिर्फ 40 सेंटीमीटर नीचे है। इस आपदा से करीब 2.17 लाख ग्रामीण और 25,000 शहरी लोग प्रभावित हुए हैं।

  • 56 पंचायतों के 178 गांव और 347 वार्ड पानी में डूबे
  • गंगा नदी खतरे के निशान से 78 सेंटीमीटर ऊपर
  • 2.17 लाख ग्रामीण और 25,000 शहरी लोग प्रभावित
  • शंकarpur गांव में 100 साल पुराना मंदिर नदी में समाया

मंदिर का टूटना और बुनियादी ढांचे को नुकसान

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1 सितंबर से 3 सितंबर 2026 के बीच शंकरपुर गांव में एक 100 साल पुराना स्थानीय ऐतिहासिक स्थल, चैती माता दुर्गा मंदिर और श्री बजरंगबली मंदिर, नदी के कटाव और तेज बहाव में बह गया। बुनियादी ढांचे पर भी इसका बड़ा असर पड़ा है। पानी भरने से एनएच-30 और एनएच-80 पर यातायात बाधित हो गया है और नाथनगर के बेलखुरिया में मध्य विद्यालय चारों तरफ से पानी से घिर गया है। सबौर ब्लॉक में 11,000 वोल्ट का बिजली का खंभा बह गया था, जिसे बाद में ठीक कर लिया गया।

प्रशासनिक राहत और बचाव कार्य

जिला मजिस्ट्रेट अलंकृता पांडे ने चल रहे राहत कार्यों की जानकारी देने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रशासन ने अब तक 71 सरकारी नौकाओं का उपयोग करके 22,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है। राहत कार्यों के लिए एसडीआरएफ की पांच टीमें, 17 मोटरबोट और 501 'आपदा मित्र' स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, 24 अगस्त से 15 सामुदायिक रसोई के जरिए 100,000 से अधिक लोगों को भोजन कराया गया है, और टीएनबी कॉलेजिएट सहित सात राहत शिविर अभी भी चालू हैं। अधिकारियों ने 4,000 पॉलीथीन शीट और तिरपाल बांटे हैं, और सुरक्षा उपायों के लिए 9,000 से अधिक मवेशियों का पंजीकरण किया गया है।

नेताओं के दौरे और बयान

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैशाली और सारण में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और अधिकारियों को घर-घर जाकर नुकसान का आकलन करने तथा किसानों को मुआवजा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा ने कहा कि तटबंध टूटने वाले संवेदनशील इलाकों को छोड़कर स्थिति नियंत्रण में है। वहीं, अपर जिला मजिस्ट्रेट (आपदा प्रबंधन) कुंदन कुमार ने पुष्टि की कि पानी कम होने के बाद शहरी इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर और चूना छिड़का जाएगा। उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी तथा केंद्रीय मंत्री लalan सिंह ने भी स्थिति की समीक्षा की और जोर दिया कि प्रशासन आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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