भागलपुर के गोपालपुर प्रखंड में गंगा नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर अपने सर्वोच्च बाढ़ स्तर के बिल्कुल करीब पहुंच चुका है, जिससे पूरे इलाके में तबाही का खतरा मंडरा रहा है। बुधवार सुबह छह बजे इस्माईलपुर-बिंद टोली सुरक्षा बांध संख्या-7 पर गंगा का जलस्तर 33.44 मीटर दर्ज किया गया। पिछले 12 घंटों में नदी के जलस्तर में चार सेंटीमीटर की अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गंगा अब वर्ष 2021 में दर्ज किए गए अपने ऐतिहासिक सर्वोच्च बाढ़ स्तर से महज छह सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
पानी की तेज रफ्तार और बढ़ते दबाव के कारण बांध संख्या-7 की स्थिति बेहद नाजुक है। इसके साथ ही क्षेत्र का अतिसंवेदनशील ब्रह्मोत्तर बांध भी खतरे में है। ब्रह्मोत्तर बांध के जिन हिस्सों पर तटबंध कमजोर हैं, वहां बाढ़ का पानी सीधे और भारी दबाव बना रहा है। जलसंसाधन विभाग के अभियंता और तकनीकी टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन पानी का थपेड़ा लगातार बांधों की मजबूती को चुनौती दे रहा है।
गंगा के इस रौद्र रूप को देखकर तटवर्ती गांवों के निवासियों में संभावित कटाव और बाढ़ के डर से अफरा-तफरी का माहौल है। लोगों को डर है कि अगर बांध टूटा तो जान-माल का भारी नुकसान होगा। गोपालपुर के किसान रमेश मंडल ने अपनी चिंता साझा करते हुए कहा कि सोचते हैं कि रात में बांध टूट गया तो क्या होगा और हमारे बच्चे, मवेशी, सब बह जाएंगे। रमेश जैसे सैकड़ों किसानों ने खरीफ सीजन के लिए धान और मक्के की फसल लगाई है, जो अब डूबने की कगार पर है। ग्रामीणों के लिए उनके मवेशी सिर्फ जीव नहीं, बल्कि आजीविका का मुख्य साधन हैं। घर डूबने और सालों की गाढ़ी कमाई से खड़े किए गए आशियाने के उजड़ने के डर से ग्रामीणों की रातें जागकर गुजर रही हैं। लोग लाठी-टर्च लेकर खुद बांधों की पहरेदारी कर रहे हैं ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में तुरंत अलर्ट किया जा सके।