भागलपुर में बाढ़ का बड़ा खतरा, गंगा उफान पर और टीएमबीयू डूबा

MyBhagalpur Team5 October 20262 min read0 viewsBihar
भागलपुर में बाढ़ का बड़ा खतरा, गंगा उफान पर और टीएमबीयू डूबा

भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से बाढ़ का संकट गहरा गया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी घुस गया है। - गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पार पहुंचा। - तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर झील में बदला। - शहर की मुख्य सड़कों पर दो से तीन फीट पानी जमा। - नाथनगर, चंपानगर और बुनकर बस्तियों में घरों के अंदर पानी घुसा।

विश्वविद्यालय और शहर के कई इलाके जलमग्न

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर एक बार फिर पूरी तरह से झील में तब्दील हो चुका है। विश्वविद्यालय के लालबाग प्रोफेसर कॉलोनी और पीजी गर्ल्स हॉस्टल में दोबारा बाढ़ का पानी घुसने से हड़कंप मच गया है। विश्वविद्यालय परिसर के अलावा शहर के कई निचले और तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति भयावह हो गई है। यूनिवर्सिटी का प्रशासनिक भवन, सीनेट हॉल, मारवाड़ी कॉलेज हॉस्टल रोड, सिटी कॉलेज और पीएनए साइंस कॉलेज के रास्ते पूरी तरह डूब चुके हैं।

सड़कों पर पानी और ठप पड़े काम

मुख्य सड़कों पर 2 से 3 फीट तक पानी जमा है। नाथनगर और चंपानगर इलाकों के निचले मुहल्लों और बुनकर बहुल बस्तियों में बाढ़ का पानी घरों के अंदर तक प्रवेश कर चुका है। बरारी और मायागंज के तटीय रिहायशी इलाकों के साथ-साथ कई मुख्य संपर्क मार्गों पर पानी फैल गया है। एनएच-80 (भागलपुर-कहलगांव मार्ग) और सुल्तानगंज के शहरी इलाकों से सटे हिस्सों में भी पानी का दबाव बढ़ गया है। पानी बढ़ने से यूनिवर्सिटी परिसर में नाव चलने की नौबत आ गई है। प्रशासनिक और परीक्षा भवनों के ग्राउंड फ्लोर में पानी भरने से छात्रों के प्रमाण पत्र वितरण और आवश्यक आधिकारिक कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं।

छात्रों की परेशानी और विषैले जीवों का खतरा

पीजी गर्ल्स हॉस्टल और अन्य छात्र आवासों में पानी भरने से बिजली और पेयजल की भारी किल्लत हो गई है। जलजमाव के कारण छात्राएं हॉस्टल छोड़कर अपने घर लौटने को मजबूर हैं, वहीं जो छात्र फंसे हैं वे खुद को कमरों में कैदी जैसा महसूस कर रहे हैं। बाढ़ के पानी के साथ प्रोफेसर कॉलोनी और हॉस्टलों में खतरनाक सांप (जैसे कोबरा), बिच्छू और अन्य विषैले कीड़े-मकोड़े घुस रहे हैं, जिससे स्थानीय निवासियों और छात्रों में भारी दहशत है। सड़कों पर घुटने से लेकर कमर तक पानी होने के कारण लोगों को आने-जाने के लिए असुरक्षित नावों, ठेलों या प्रदूषित पानी में तैरकर जाना पड़ रहा है। जमा हुए बाढ़ के गंदे पानी से बदबू आने लगी है, जिससे जलजनित और मच्छरजनित बीमारियों (जैसे डेंगू, मलेरिया, डायरिया) के फैलने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय नगर निगम से प्रभावित इलाकों में पानी निकालने के लिए पंप लगाने और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव की मांग की जा रही है। यदि गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी इसी तरह जारी रही, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी नियंत्रण से बाहर हो सकती है।

MyBhagalpur की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel
Share:

Comments

Leave a comment