भागलपुर में पानी घटने से बढ़ीं मुश्किलें, जिंदगी पटरी पर लाने की चुनौती

भागलपुर जिले में गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में गिरावट आने के बाद विभिन्न गांवों से बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतर रहा है। पानी घटने के बावजूद निचले इलाकों और दियारा क्षेत्र के गांवों में जलजमाव और कीचड़ ने बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बरकरार रखी हैं। सालों की कमाई से बने आशियाने जब पानी से मुक्त हो रहे हैं, तो पीछे सिर्फ तबाही के निशान, सिल्ट और दुर्गंध बची है। ग्रामीण अपने घरों को लौटने की आस में तो हैं, लेकिन वहां रहने लायक स्थितियां बनने में अभी 15-20 दिनों का समय लग सकता है। जिले के नाथनगर, सुल्तानगंज, रंगरा चौक, और सबौर प्रखंड के दर्जनों गांव इस विभीषिका से सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बाईपास थाना क्षेत्र के कोयली खुटाहा गांव में बाढ़ के पानी के कारण हाल ही में एक ही परिवार के सदस्यों सहित 5 लोगों के डूबने की दर्दनाक घटना हुई थी, जिसके घाव अभी भी हरे हैं। सड़कों पर जमा पानी घटने के बाद अब यहां कीचड़ और गड्ढों का साम्राज्य है। उधर कोसी नदी के दबाव के कारण रेलवे लाइन तटबंध टूटने से इन गांवों में भारी मात्रा में पानी घुसा था। अब पानी तो कम हो रहा है, लेकिन गलियां दलदल में तब्दील हो चुकी हैं। नाथनगर दियारा क्षेत्र के सैकड़ों लोग अब भी छतों या ऊंचे टीन शेड वाले स्थानों पर शरण लिए हुए हैं, क्योंकि उनके घरों के अंदर घुटनों तक कीचड़ भरा हुआ है। बाढ़ के कारण धान, मक्का और सब्जी की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। खेतों में अभी भी कई फीट पानी जमा है, जिससे आने वाले दिनों में रबी फसल की बुवाई को लेकर भी किसान चिंतित हैं। इसके अलावा, मवेशियों के लिए चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। दैनिक मजदूरों के पास गांवों में कोई काम नहीं बचा है, जिससे उनके सामने आर्थिक तंगी का बड़ा पहाड़ खड़ा हो गया है। पानी उतरने के साथ ही जलजनित बीमारियों और मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव और स्वास्थ्य कैंप लगाए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में दवाइयों की मांग और अधिक है। बाढ़ के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश चापाकल दूषित हो चुके हैं। फिलहाल लोग प्रशासन और स्वयंसेवकों द्वारा बांटे जा रहे पानी के जार और हैलोजन टैबलेट्स के भरोसे शुद्ध पेयजल प्राप्त कर पा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा जिले में लगातार सामुदायिक रसोई का संचालन किया जा रहा है, जहां प्रभावितों को दो वक्त का भोजन मिल रहा है। राहत शिविरों में बच्चों के लिए खेल-खेल में पढ़ाई और मंजूषा कला जैसी रचनात्मक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं ताकि वे आपदा के तनाव से दूर रह सकें। जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय और प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहे हैं। राहत शिविरों में दूध, भोजन और मवेशियों के चारे का प्रबंध किया गया है। इसके साथ ही, राज्य सरकार के निर्देश पर भागलपुर के 1.16 लाख से अधिक पीड़ित परिवारों के खातों में 7,000 की अंतरिम राहत राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भेजी जा रही है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें अभी भी दियारा इलाकों में गश्त पर हैं। प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय समाजसेवी और युवा संगठन भी इस संकट में आगे आए हैं। विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा नावों के सहारे सुदूर बाढ़ प्रभावित टोलों में जाकर चूड़ा, गुड़, सत्तू, मोमबत्ती, ब्रेड, बिस्कुट और जरूरी दवाइयां सीधे पीड़ितों तक पहुंचाई जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि गांवों से पानी का घटना भले ही राहत की खबर हो, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू हुई है। कीचड़ की सफाई, महामारी से बचाव, टूटी सड़कों की मरम्मत और किसानों के पुनर्वास के लिए प्रशासन को युद्ध स्तर पर और लंबी अवधि तक काम करना होगा।