भागलपुर में बाढ़ का पानी घटा, अब बीमारी का खतरा बढ़ा

भागलपुर में गंगा नदी का पानी तेजी से घट रहा है। 12 अक्टूबर 2026 को गंगा नदी का जलस्तर 32.11 मीटर दर्ज किया गया। राज्य जल संसाधन विभाग के अनुसार यह स्तर खतरे के निशान 33.68 मीटर से 1.57 मीटर नीचे है। निचले इलाकों के खेत और मोहल्ले पानी से बाहर आ रहे हैं। लेकिन पानी के हटने से गड्ढों में गंदा पानी रुक गया है जिससे मच्छरों के पनपने की जगह बन गई है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, दस्त और त्वचा के संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ने की चिंता जताई है। पीरपैंती क्षेत्र में 7 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार बुजुर्गों और दिव्यांगों में आँख, कान और त्वचा के संक्रमण बढ़े हैं। पीरपैंती के स्थानीय उप-मंडलीय बुनियाद केंद्र में पिछले दो महीनों से नेत्र विशेषज्ञ का पद खाली है जिससे चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई हैं। 20 सितंबर 2026 को भागलपुर की मेयर डॉ. वसुंधरा लाल ने एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और अधिकारियों को प्रभावित वार्डों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा स्प्रे करने का निर्देश दिया।
जलस्तर घटने के बावजूद जिले के सामने कई मुश्किलें हैं। 10 और 11 अक्टूबर को राघोपुर-काजीकोरेया तटबंध और शंकरपुर इलाके में कटाव के कारण कई घर और एक मंदिर नदी में समा गए। इस कटाव से रोड नंबर 14 को भी खतरा पैदा हो गया है जिसके बाद जल संसाधन विभाग ने वहां बचाव के लिए बालू की बोरियां लगाई हैं। इसके अलावा 11 अक्टूबर 2026 को एक दो मंजिला इमारत के नदी में गिरने के बाद राहत कार्यों में मदद के लिए राज्य आपदा मोचन बल यानी SDRF को तैनात किया गया था। 12 अक्टूबर 2026 की रात तक कहलगांव में भी जलस्तर 17 सेंटीमीटर और कम होने की सूचना मिली है।