भागलपुर में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने पनीर में फॉर्मेलिन और मिठाइयों में हानिकारक रंगों के इस्तेमाल के खिलाफ सख्त जांच अभियान शुरू किया है। अगस्त से अब तक आधा दर्जन दुकानदारों पर कार्रवाई की गई है। इस बीच मोबाइल लैब के लिए ड्राइवर न होने से जांच में परेशानी आ रही है।
- भागलपुर और नौगछिया में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की ताबड़तोड़ छापेमारी
- डेढ़ क्विंटल से ज्यादा खराब और गंदी मिठाइयां नष्ट की गईं
- पनीर और मिठाइयों के नमूने जांच के लिए पटना लैब भेजे गए
27 अक्टूबर 2026 को नौगछिया में
खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजहंस कुमार के नेतृत्व में दीपावली के त्योहारी सीजन को देखते हुए छापेमारी की गई। इस दौरान
लगभग 1.5 क्विंटल मिठाइयों को नष्ट कर दिया गया क्योंकि वे बेहद अस्वच्छ स्थिति में थीं और उनमें अनियमितताएं पाई गईं। पनीर, देसी घी, पेड़ा, लड्डू, कलाकंद, रस कदम और रसगुल्ला के सैंपल लेकर
पटना की राज्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं। अधिकारी ने कहा कि लैब रिपोर्ट फेल आने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बिहार के खाद्य सुरक्षा आयुक्त और स्वास्थ्य सचिव आईएएस कुमार रवि के नेतृत्व में घटिया खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। पिछले तीन महीनों में स्वास्थ्य विभाग ने
531 खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की है। इस अभियान के तहत
15 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 2 लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इसके अलावा खामियां मिलने पर 14 दिन का सुधार नोटिस दिया गया है।
26 अक्टूबर 2026 को अधिकारियों ने बताया कि बिहार सरकार
मुजफ्फरपुर और भागलपुर में नई खाद्य प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना बना रही है ताकि जांच क्षमता बढ़ाई जा सके। वहीं, पूर्व खाद्य सुरक्षा अधिकारी अर्जुन प्रसाद और पूर्व सहायक नामित अधिकारी तापेश्वरी सिंह ने मिलावट पहचानने के तरीके बताए।
आयोडीन घोल का उपयोग करके पनीर में स्टार्च का पता लगाया जा सकता है, जहां गहरा नीला या काला रंग मिलावट का संकेत देता है।
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने दोहराया है कि सरकार जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ पर जीरो टॉलरेंस की नीति रखती है।