भागलपुर में गंगा से गाद हटाने की तैयारी से डॉल्फिन के आशियाने पर मंडराया संकट

MyBhagalpur Team22 September 20261 min read6 viewsBihar
भागलपुर में गंगा से गाद हटाने की तैयारी से डॉल्फिन के आशियाने पर मंडराया संकट

भागलपुर में इस साल बाढ़ की मार झेलने के बाद टूटे तटबंधों के सामने गंगा नदी से बालू और गाद हटाने के लिए ड्रेजिंग की तैयारी शुरू कर दी गई है। इससे पानी का बहाव ठीक होने और बाढ़ व कटाव से राहत मिलने का दावा किया जा रहा है।

भागलपुर में गंगा से गाद हटाने की तैयारी शुरू
गांगेय डॉल्फिन के पारिस्थितिकी तंत्र पर संकट
सुल्तानगंज से कहलगांव तक विक्रमशिला अभयारण्य
मशीनों के शोर और मटमैले पानी से खतरा

ड्रेजिंग से डॉल्फिन को खतरा

पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों के जीवन पर बड़ा संकट आ सकता है। भागलपुर में सुल्तानगंज से कहलगांव तक का इलाका 'विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य' के रूप में सुरक्षित है।

मशीनों का शोर और आक्सीजन की कमी

ड्रेजिंग के दौरान भारी मशीनों का शोर गूंजेगा। डॉल्फिन देख नहीं सकतीं और रास्ता खोजने व शिकार के लिए 'इकोलोकेशन' यानी ध्वनि तरंगों पर निर्भर होती हैं, इसलिए तेज आवाज से वे भ्रमित और तनाव में आ जाएंगी। तलहटी से गाद निकलने से पानी बहुत मटमैला हो जाएगा, जिससे ऑक्सीजन घटेगी और डॉल्फिन व मछलियों का दम घुटने लगेगा।

खाद्य जाल और कटाव का डर

गाद और बालू छोटी मछलियों का प्राकृतिक घर होते हैं जो डॉल्फिन का मुख्य भोजन हैं। ड्रेजिंग से यह पूरा खाद्य जाल नष्ट हो सकता है। पहले कहलगांव-पीरपैंती के रानी दियारा में ड्रेजिंग के बाद नदी की धारा बदलने से भारी कटाव हुआ था और ग्रामीणों के विरोध के कारण काम रोकना पड़ा था।

पर्यावरणविदों की मांग

पर्यावरणविद् दीपक कुमार का सवाल है कि क्या ड्रेजिंग से पहले डॉल्फिन के बचाव और नदी की धारा पर असर का वैज्ञानिक आकलन हुआ है? यह काम सिर्फ गाद हटाने तक सीमित न रखकर डॉल्फिन के अनुकूल व्यापक नदी प्रबंधन योजना के तहत ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

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