भागलपुर के पास गंगा नदी में रहने वाली डॉल्फिन ने शोर-शराबे और रहने की जगह खत्म होने के कारण अपनी पुरानी जगह छोड़ दी है। आइए जानते हैं इस बड़ी खबर की मुख्य बातें: - विक्रमशिला सेतु की मरम्मत के काम और जहाजों के आने-जाने से शोर बढ़ा है। - पिछले 15 से 20 दिनों में डॉल्फिन ने अपनी रहने की जगह बदल ली है। - देश में सबसे ज्यादा डॉल्फिन महादेवापुर घाट के पास रहती थीं, जो अब बहुत प्रभावित हुआ है।
जल प्रहरी के लोगों ने बताया है कि विक्रमशिला सेतु की मरम्मत के लिए कंक्रीट काटने वाली भारी मशीनों और मालवाहक जहाजों के इंजन से बहुत तेज आवाज निकलती है। डॉल्फिन रास्ता खोजने और शिकार करने के लिए खास आवाजों का इस्तेमाल करती हैं। इन तेज और लगातार आवाजों से उनकी बातचीत का सिस्टम खराब हो रहा है, जिससे वे अपनी सुरक्षित और पुरानी जगहों से दूर जाने को मजबूर हो गईं।
खरक और गोपालपुर प्रखंडों के पास महादेवापुर घाट के नजदीक बहुत ज्यादा मिट्टी का कटाव हुआ है, जिससे डॉल्फिन के रहने के लिए जरूरी शांत पानी वाली जगहें खत्म हो गई हैं। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने इस खतरे को लेकर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को आधिकारिक रूप से बता दिया है। वन विभाग की एक खास टीम डॉल्फिन की नई जगहों का पता लगाने और उनके जीवन तथा बच्चे पैदा करने पर पड़ने वाले असर की जांच के लिए वैज्ञानिक सर्वे कर रही है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी इस पुल प्रोजेक्ट से हुए पर्यावरण के नुकसान की जांच की है, लेकिन अभी उनकी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी जानी बाकी है।
पर्यावरणविद् दीपक कुमार ने चेतावनी दी है कि जब तक जहाजों की गति और निर्माण की मशीनों को लेकर कड़े नियम नहीं बनाए जाते, तब तक इस सुरक्षित अभयारण्य का बचना मुश्किल है। भागलपुर में वन विभाग के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक डॉ. एस. कुमारसामी ने साफ किया है कि डॉल्फिन ने पूरी तरह से इलाका नहीं छोड़ा है, बल्कि अपने रहने की जगह बदली है। उन्होंने बताया कि विभाग उनकी गतिविधियों पर पूरी नजर रख रहा है और पुल के निर्माण कार्य पर भी विभाग की नजर है तथा सभी जरूरी जानकारी मंत्रालय को भेजी जा रही है।