भागलपुर के अस्पतालों में इलाज के रेट लिस्ट नहीं दिखने से मरीज परेशान

MyBhagalpur Team16 October 20262 min read0 viewsHealth
भागलपुर के अस्पतालों में इलाज के रेट लिस्ट नहीं दिखने से मरीज परेशान

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बिहार समेत सभी राज्यों को मेडिकल इलाज और जांच के रेट साफ-साफ दिखाने का आदेश दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बिहार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्वास्थ्य खर्च बताने के नियमों की जांच करने को कहा है। आदेश में कहा गया है कि रेट चार्ट अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं में साफ दिखने चाहिए ताकि मरीजों और उनके परिवारवालों को इलाज के खर्च की पूरी जानकारी मिल सके। 12 अक्टूबर को नोटिस जारी होने के बावजूद भागलपुर में नियमों का पालन बहुत खराब है। जिले के प्राइवेट अस्पतालों और जांच केंद्रों ने एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, एंजियोग्राफी, एक्स-रे और पैथोलॉजी टेस्ट के रेट चार्ट नहीं दिखाए हैं। सरकारी मायागंज और सदर अस्पतालों के अंदर चल रहे प्राइवेट एमआरआई और सीटी स्कैन केंद्रों ने अपने रेट दिखाए हैं, लेकिन ज्यादातर प्राइवेट जगहों पर ऐसा नहीं है, जिससे मरीज पहले से इलाज का खर्च नहीं जान पा रहे हैं। यह केंद्रीय आदेश क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 और 2012 के तहत दिया गया है।

दवाइयों और फीस में भारी अंतर

तिलकामांझी हटिया रोड इलाके में डॉक्टर की फीस 200 से 1500 रुपये तक है। सुल्तानगंज के मृत्युंजय यादव के रिश्तेदार राहुल कुमार ने बताया कि जीरो माइल के पास एक नर्सिंग होम में चार दिन के आईसीयू इलाज का 1.10 लाख रुपये बिल आया। उन्होंने बताया कि मास्क और सीरिंज जैसी चीजों के दाम बाजार से काफी ज्यादा थे।

आगे की कार्रवाई और डॉक्टरों की मांग

चूंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए इसे लागू करने और जांचने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बिहार के मुख्य सचिव से इन नियमों को लागू करने और स्थानीय अधिकारियों को निर्देश देने को कहा है। आईएमए भागलपुर चैप्टर की अध्यक्ष डॉ. रोमा यादव ने कहा कि रेट चार्ट लागू करने से पहले राज्य सरकार को आईएमए जैसे मेडिकल संगठनों से बात करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को सीनियर और जूनियर डॉक्टरों की फीस तय करने के लिए एक जैसा रेट स्ट्रक्चर बनाना चाहिए।

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