भागलपुर संग्रहालय परिसर में मंगलवार को पांचवीं 'मंजूषा हटिया' का आयोजन किया गया। इस एक दिवसीय बाजार में मंजूषा लोक कला को दीवार की पेंटिंग्स से बदलकर रोजमर्रा के व्यावसायिक उत्पादों के रूप में दिखाया गया। इस आयोजन से बीस हजार रुपये से अधिक की बिक्री हुई।
- भागलपुर संग्रहालय परिसर में पांचवीं मंजूषा हटिया का सफल आयोजन
- एक दिवसीय बाजार में बीस हजार रुपये से अधिक की हुई कुल बिक्री
- बाढ़ राहत शिविरों के बच्चों की कलाकृतियों ने खींचा सबका ध्यान
इस बाजार में टी-शर्ट, साड़ियां, स्कार्फ, रुमाल, बैग, शोपीस, सजावटी पंखे और जूट आधारित उत्पाद शामिल रहे। बाढ़ राहत शिविरों में रहने वाले बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियां भी इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण थीं। जिलाधिकारी अलंकारिता पांडे ने इनमें से एक कलाकृति को खरीदकर युवा प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया, जिसका उद्देश्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और सकारात्मक मंच प्रदान करना था।
यह आयोजन स्थानीय कलाकारों के लिए एक सहयोगात्मक मंच साबित हुआ, जहां कई लोगों ने साथी कलाकारों के काम को खरीदकर उनका समर्थन किया। वरिष्ठ कलाकारों ने युवा प्रतिभागियों को आधुनिक प्रयोग और बाजार की मांगों के अनुसार ढलने के लिए मार्गदर्शन दिया। जिला कला एवं संस्कृति अधिकारी अंकित रंजन ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य कलाकारों को एक साझा मंच और बाजार तक पहुंच प्रदान करना है। उन्होंने वाणिज्यिक पहुंच को बढ़ाने के लिए मंजूषा उत्पादों को डिजिटल बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफार्मों में एकीकृत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मंजूषा हटिया पहल का उद्देश्य लोक कला को टिकाऊ आजीविका से जोड़ना है, जिससे पारंपरिक डिजाइनों को आधुनिक और उपयोगी सामानों में बदलकर स्थानीय कारीगरों के लिए आय के नए रास्ते खुल सकें।