भागलपुर के खादी अंग वस्त्रों ने राष्ट्रीय मंच पर बिखेरी चमक

नई दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में एनआईएफटी 2026 के दीक्षांत समारोह में भागलपुर के हाथ से बुने खादी अंग वस्त्रों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं और केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सरकारी अधिकारी, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य, वरिष्ठ कर्मचारी, शिक्षक और विद्वान भी मौजूद रहे जिन्होंने डिजाइन शिक्षा में पारंपरिक खादी और शिल्प को शामिल करने की इस पहल की सराहना की। एनआईएफटी ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग को इन कपड़ों के निर्माण का दिया था आदेश बिहार राज्य बुनकर कल्याण समिति के पूर्व सदस्य अलीम अंसारी के अनुसार, एनआईएफटी ने इन कपड़ों के उत्पादन के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग को आर्डर दिया था। इस प्रोजेक्ट में पास होने वाले छात्रों के लिए 3,850 सूती खादी अंग वस्त्र और मेहमानों के लिए 550 खादी सिल्क अंग वस्त्र तैयार किए गए। इसके डिजाइन और विकास की जिम्मेदारी खादी उत्कृष्टता केंद्र को दी गई थी, और डिजाइन तैयार करने से लेकर बुनाई, छपाई और फिनिशिंग तक का पूरा काम करीब छह महीने में पूरा हुआ। तीन खादी क्लस्टर ने मिलकर किया काम इस प्रोजेक्ट में तीन खादी क्लस्टर शामिल थे, जिनमें सोनपुर, ओडिशा की बुद्धिमान खादी सिल्क पट्टा इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, भागलपुर, बिहार की रेशम बुनकर खादी ग्रामोद्योग संघ और असम का तामुलपुर आंचलिक ग्रामदान संघ शामिल हैं। कारीगरों ने 900 किलो हाथ से काते गए सूती धागे और 80 किलो से ज्यादा हाथ से बेड़े गए ट्यूसर सिल्क धागे का इस्तेमाल किया। 84 करघों पर काम करने वाले बुनकरों ने इस कार्यक्रम के लिए 11,000 मीटर से ज्यादा खादी का कपड़ा तैयार किया। अलीम अंसारी ने बताया कि एनआईएफटी जैसे बड़े राष्ट्रीय संस्थान में भागलपुर की बुनाई कला को शामिल किए जाने से पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन और बड़े बाजारों से जोड़ने की क्षमता पता चलती है। यह पहल स्थानीय बुनकरों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है जिससे उनकी कला को स्थानीय बाजार से आगे एक राष्ट्रीय मंच मिला है।