भागलपुर की ललिता देवी का कमाल: 100 रुपये की दिहाड़ी से बनीं सफल बिजनेसवुमन

100 रुपये दिहाड़ी से शुरू हुआ सफर अब मखाना पापड़ के बड़े बिजनेस तक पहुंचा। जानिए ललिता देवी की प्रेरणादायक कहानी।

SHRUTI KUMARI5 November 20262 min read0 viewsDevelopment and good news
भागलपुर की ललिता देवी का कमाल: 100 रुपये की दिहाड़ी से बनीं सफल बिजनेसवुमन

बिहार के भागलपुर जिले की रहने वाली ललिता देवी ने साबित कर दिया है कि अगर हौसला बुलंद हो और मेहनत करने का जज्बा हो, तो गरीबी की बेड़ियां तोड़ी जा सकती हैं। जिस महिला ने कभी अपने परिवार का पेट पालने के लिए महज 100 रुपये की दिहाड़ी पर काम किया था, आज वह एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। ललिता देवी की यह कहानी संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की एक मिसाल है।

ललिता देवी का सफर आसान नहीं था। भागलपुर के जीछो की रहने वाली ललिता एक बेहद कठिन दौर से गुजर रही थीं। उनके पति बेरोजगार थे और घर में चार बेटियों की जिम्मेदारी थी। दो कमरों के छोटे से मकान में रहने वाली ललिता ने शुरुआत में सत्तू बनाने के लिए चने भूनने का काम किया, जिससे उन्हें दिन के सिर्फ 100 रुपये मिलते थे। यह रकम इतनी कम थी कि उससे परिवार की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही थीं। लेकिन ललिता ने हार नहीं मानी और अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए खुद का सत्तू बनाकर बेचना शुरू किया।

जीविका से मिला सहारा और बढ़ा कारोबार

MyBhagalpur की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

जैसे-जैसे समय बीता, ललिता ने बाजार की मांग को समझा और अपना ध्यान अचार बनाने की ओर लगाया। अचार के बिजनेस में उन्हें अच्छी प्रतिक्रिया मिली, जिसके बाद उन्होंने अपने उत्पादों में बड़ी (Badi) को भी शामिल किया। हालांकि शुरुआत में बाजार जमाने में काफी मुश्किलें आईं, लेकिन उनकी निरंतर मेहनत रंग लाई और बिक्री बढ़ने लगी।

उनके जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब वह 'जीविका' संगठन से जुड़ीं। जीविका के माध्यम से उन्हें लोन मिला, जिसने उनके सपनों को नई उड़ान दी। इस वित्तीय मदद से उन्होंने पापड़ का उत्पादन शुरू किया। आज ललिता देवी का बिजनेस केवल अचार और बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके द्वारा बनाए गए मखाना पापड़ की मांग पूरे बिहार में तेजी से बढ़ रही है।

एक दिहाड़ी मजदूर से एक स्वतंत्र बिजनेसवुमन बनने तक का यह सफर न केवल उनके परिवार के लिए खुशहाली लाया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाइयों पर ले गया है। आज वह आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

Share:

Comments

Leave a comment