भागलपुर की पारंपरिक मंजूषा कला अब सात समंदर पार अमेरिका तक पहुंच गई है। अंग क्षेत्र की इस लोक कला को कलाकारों ने छठ महापर्व में इस्तेमाल होने वाले सूप पर उकेरा है, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
- मंजूषा विशेषज्ञ मनोज पंडित और उनकी टीम ने 100 हाथ से पेंट किए सूप अमेरिका भेजे
- इंडिया पोस्ट के जरिए इन सूपों को अमेरिका में रह रहे श्रद्धालुओं तक पहुंचाया गया
- कुल 200 सूप का ऑर्डर मिला था, लेकिन कम संसाधनों और उत्पादन क्षमता के कारण सिर्फ 100 ही भेजे जा सके
- एक यूनिट की लागत कलात्मक निर्माण और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मिलाकर करीब 1,500 रुपये है
मनोज पंडित ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य भागलपुर की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना है। इस टीम में वरिष्ठ कलाकार और प्रिंसिपल सुमाना अमन के साथ-साथ सागर सृष्टि, श्रुति राय, निर्मला देवी, प्रीति कुमारी, कविता देवी, पवन कुमार, सागर, वर्षा कुमारी, मानवी कुमारी और वैष्णवी कुमारी शामिल हैं। कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से भी इन कलात्मक सूपों के लिए नए पूछताछ (इक्वायरी) आए हैं और बातचीत चल रही है। इन ऑर्डरों को अंतिम रूप देने से पहले टीम को उत्पादन बढ़ाने और संसाधन प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना होगा। संभावित मांग को पूरा करने के लिए पंडित ने सुझाव दिया कि अन्य स्थानीय कलाकारों के साथ सहयोग से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय पहुंच के अलावा, अंग क्राफ्ट मंजूषा आर्ट ट्रेनिंग सेंटर भागलपुर में 'मंजूषा सूप हटिया' का आयोजन कर रहा है ताकि त्योहार के लिए स्थानीय लोगों को सजावटी और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण सूप उपलब्ध कराए जा सकें। मनोज पंडित ने बताया कि मंजूषा कला इससे पहले राष्ट्रपति भवन तक पहुंच चुकी है, और यह नया अंतरराष्ट्रीय विकास इस पारंपरिक लोक कला के विस्तार में एक बड़ा मील का पत्थर है।