जानिए कैसे भागलपुर की 'मशरूम लेडी' स्वर्ण संध्या ने बदल दी अपनी किस्मत

MyBhagalpur Team20 October 20262 min read0 viewsDevelopment and good news
जानिए कैसे भागलपुर की 'मशरूम लेडी' स्वर्ण संध्या ने बदल दी अपनी किस्मत

बिहार के भागलपुर जिले के सबौर की रहने वाली स्वर्ण संध्या भारती आज मशरूम की खेती से सफल उद्यमी और ट्रेनर बन गई हैं। उन्हें स्थानीय लोग 'मशरूम लेडी' के नाम से जानते हैं। उनकी शुरुआती जिंदगी बहुत गरीबी में गुजरी थी। एक समय ऐसा था जब उनके पास खाने के लिए दो वक्त की रोटी और घर में बिजली तक नहीं थी। आज उन्होंने अपनी मेहनत से चार मंजिला मकान और काफी कृषि भूमि बना ली है। उनकी यह सफलता महिलाओं के लिए एक मिसाल है। - जीविका पहल के तहत कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग ली - 2018 में एक महीने की ट्रेनिंग के बाद मिले दो किलो मशरूम बीज - आम के मेले से कमाए 2000 रुपये से की शुरुआत - वर्तमान में हर महीने 10 क्विंटल ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन और बिक्री - जिले के विभिन्न ब्लॉकों में 5,000 से अधिक महिलाओं को दिया प्रशिक्षण

संघर्ष और शुरुआत की कहानी

स्वर्ण संध्या भारती की यह यात्रा कृषि विज्ञान केंद्र में जीविका पहल के माध्यम से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद शुरू हुई। साल 2018 में एक महीने का प्रशिक्षण सत्र पूरा करने के बाद उन्हें उत्पादन शुरू करने के लिए दो किलो मशरूम के बीज मिले थे। शुरुआती दौर में उन्हें परिवार और समाज के विरोध का सामना करना पड़ा। सबौर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में आम के मेले से कमाए गए 2,000 रुपये के शुरुआती निवेश से उन्होंने अपना काम शुरू किया। अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों में वैज्ञानिक अनीता कुमारी ने उन्हें मुख्य तकनीकी सहायता प्रदान की थी। जैसे-जैसे उनका व्यवसाय बढ़ा और आमदनी होने लगी, उनके पति और दोनों बेटों का पूरा समर्थन उन्हें मिल गया।

उत्पादन और महिलाओं को ट्रेनिंग

वर्तमान में भारती हर महीने 10 क्विंटल ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन और बिक्री करती हैं। अपनी व्यक्तिगत सफलता के अलावा, वह केवीके और आत्मा, भागलपुर के साथ मिलकर जिले के विभिन्न ब्लॉकों में 5,000 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भरता का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। प्रशिक्षण लेने वाली पूजा कुमारी ने बताया कि उन्होंने मशरूम से पापड़ और अचार जैसे मूल्य वर्धित उत्पाद बनाना सीखा है। उनके इन योगदानों के लिए उन्हें बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के किसान मेले में 'महिला किसान सम्मान' से सम्मानित किया गया है। वह मानती हैं कि उद्यमिता के लिए हमेशा बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं होती है। उनका कहना है कि लगातार प्रयास और सही ट्रेनिंग ही महिलाओं की आर्थिक आजादी की कुंजी हैं।

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