भागलपुर जिला फाइलेरिया को खत्म करने के लिए 24 सितंबर से एक बड़ा 'नाइट ब्लड सर्वे' शुरू करने जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें संक्रमण की पहचान के लिए रात 10 बजे के बाद जिले के सभी ब्लॉकों के निवासियों से खून के नमूने लेंगी। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी (DVBDCO) डॉ. दीनानाथ के अनुसार, यह सर्वे रात में इसलिए किया जाता है क्योंकि इस बीमारी के लिए जिम्मेदार माइक्रोफाइलेरिया परजीवी केवल देर रात ही परिधीय रक्त वाहिकाओं में आते हैं, जिससे सटीक जांच के लिए रात में परीक्षण करना जरूरी हो जाता है। इस पहल का उद्देश्य संक्रमित पाए गए लोगों को मुफ्त इलाज और फॉलो-अप देखभाल प्रदान करना है।
सर्वे की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए, मंगलवार को सदर अस्पताल सभागार में लैब तकनीशियनों के लिए एक दिन की गहन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। विभिन्न प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के तकनीशियनों को रक्त संग्रह, स्लाइड तैयार करने, माइक्रोफाइलेरिया के सूक्ष्मदर्शी विश्लेषण, नमूना संरक्षण और रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल में प्रशिक्षित किया गया। मास्टर ट्रेनरों ने चिकित्सा प्रोटोकॉल और स्वच्छता मानकों के सख्त पालन पर जोर दिया।
देर रात घर आने पर लोगों की झिझक को दूर करने के लिए, अंबा आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर पर गठित 'रोगी हितधारक मंच' के सदस्यों को सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और इस बीमारी के बारे में गलतफहमियों को दूर करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद ने जोर देकर कहा कि हाथीपांव (अंगों में सूजन) और हाइड्रोसील जैसी स्थायी विकलांगता को रोकने के लिए शुरुआती पहचान बहुत जरूरी है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि डॉ. आशीष टिक्का, वीडीसीओ आरती कुमारी और कृति कुमारी, एसआईएफएआर के प्रतिनिधि विवेक कुमार, और पिरामल के प्रतिनिधि विजय कुमार और प्रियदर्शिनी मोहंती सहित कई अधिकारी शामिल हुए। यह पहल भागलपुर को फाइलेरिया मुक्त जिला बनाने के लक्ष्य में एक महत्वपूर्ण कदम है।