भागलपुर बना डिजिटल रजिस्ट्री में कमाल, जानिए कैसे मिली शानदार सफलता!

भागलपुर जिला पूरे बिहार में पेपरलेस प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के मामले में टॉप तीन जिलों में शामिल हो गया है। नई तकनीकी प्रक्रिया अपनाने के बाद रजिस्ट्री की संख्या में शुरुआती कमी आई थी, लेकिन अगस्त के आंकड़ों से बड़ी रिकवरी दिख रही है। अब यह जिला वैशाली और मधुबनी के साथ बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, 21 अगस्त को 45, 22 अगस्त को 31, 24 अगस्त को 29, 25 अगस्त को 83 और 27 अगस्त को 70 दस्तावेज रजिस्टर हुए। इस डिजिटल और पेपरलेस व्यवस्था की शुरुआत मुख्य रूप से हुई है और इसमें ई-वेरिफिकेशन का इस्तेमाल होता है।
शुरुआत और नई तकनीकी व्यवस्था
यह पूरी व्यवस्था मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा 11 जुलाई 2026 को हाजीपुर रजिस्ट्री ऑफिस में लॉन्च की गई थी। 17 अगस्त 2026 तक यह बिहार के सभी 141 रजिस्ट्री ऑफिस में लागू हो गई। भागलपुर और बिहपुर ऑफिस ने इस तकनीक को 3 अगस्त 2026 से ही अपना लिया था। इस नए तरीके में ई-फाइलिंग, ई-साइनिंग, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग और ई-स्टाम्प कोड जोड़े गए हैं। सुरक्षा के लिए आधार ई-केवाईसी और सहमति से होने वाला वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है।
प्रशासनिक निर्देश और फीस में राहत
नियमों के मुताबिक खरीदारों को ई-रजिस्ट्री पोर्टल पर 13 बिंदुओं पर जानकारी देनी होती है, जिसकी जांच सर्किल ऑफिसर (सीओ) को 10 दिनों के भीतर करनी होती है। इसके पूरा होने पर डिजिटल डीड सीधे व्हाट्सएप और ईमेल पर मिल जाती है। पारदर्शिता के लिए साइट निरीक्षण में जीआईएस तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। भागलपुर के जिला सब-रजिस्ट्रार प्रियदर्शन ने बताया कि जैसे-जैसे लोग और सर्विस प्रोवाइडर इस काम को समझ रहे हैं, रजिस्ट्री की संख्या बढ़ रही है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव नवीन कुमार ने इसके लिए निर्देश जारी किए हैं। निबंधन के उप महानिरीक्षक संजय Kumar ने राजस्व अधिकारियों को 10 दिन के अंदर भूमि रिपोर्ट देने को कहा है। इसके अलावा मंत्री मदन सहनी ने डॉक्यूमेंट राइटर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मिलकर डिजिटल हस्ताक्षर और सेवा शुल्क 1,000 रुपये से घटाकर 500 रुपये करने पर सहमति जताई है। साथ ही 2026-27 वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल 2026 से सभी रजिस्ट्रेशन और जमीन ट्रांसफर के लिए पोर्टल पर अपडेटेड जमीन की जानकारी होना अनिवार्य है। इस डिजिटल मॉडल में डॉक्यूमेंट राइटर, अप्रेंटिस राइटर, स्टाम्प वेंडर और वकीलों को सर्विस प्रोवाइडर कहा गया है।