भागलपुर में अल्जाइमर दिवस पर डॉक्टरों ने दी जरूरी जानकारी

MyBhagalpur Team22 September 20262 min read5 viewsHealth
भागलपुर में अल्जाइमर दिवस पर डॉक्टरों ने दी जरूरी जानकारी

विश्व अल्जाइमर दिवस के मौके पर भागलपुर के मनस्वी हॉस्पिटल में एक खास जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मकसद मरीजों और उनके परिवारों को अल्जाइमर बीमारी के लक्षण, पहचान, इलाज और देखभाल के बारे में जानकारी देना था। इस पहल का उद्देश्य डिमेंशिया और अल्जाइमर से जुड़ी गलतफहमियों को दूर करना था, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि शुरुआती समय में डॉक्टर से सलाह लेने से मरीज की जिंदगी की गुणवत्ता में काफी सुधार हो सकता है।

  • मनस्वी हॉस्पिटल में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
  • शुरुआती मेडिकल सलाह से मरीज की हालत में सुधार संभव है।
  • डॉक्टरों ने बीमारी के लक्षणों और देखभाल के बारे में बताया।

अल्जाइमर बीमारी और उसके लक्षण

प्रसिद्ध न्यूरो-साइकाट्रिस्ट डॉ. पंकज कुमार मनस्वी ने बताया कि अल्जाइमर दिमाग से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे बढ़ती है। इससे याददाश्त, सोचने की क्षमता, फैसले लेने की योग्यता और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि बार-बार एक ही सवाल पूछना, हाल की घटनाओं को भूल जाना, जानी-पहचानी जगहों पर रास्ता भूल जाना और अचानक गुस्से या चिड़चिड़ेपन जैसे व्यवहार में बदलाव को केवल बढ़ती उम्र का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने समय पर जांच और इलाज कराने के महत्व पर जोर दिया।

मरीजों के लिए परिवार का सहयोग

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. आशुतोष रंजन ने इस बीमारी के भावनात्मक पहलू पर रोशनी डाली। उन्होंने परिवार के सदस्यों से अपील की कि वे मरीजों के साथ धैर्य, सम्मान और सहानुभूति के साथ पेश आएं। उन्होंने रोज के कामों का एक तय रूटीन बनाने, हल्की मानसिक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और मरीज को अकेलेपन व डिप्रेशन से बचाने के लिए एक सुरक्षित माहौल देने की सलाह दी।

भागलपुर में बढ़ रहे हैं मामले

मनस्वी हॉस्पिटल की मेडिकल टीम ने बताया कि भागलपुर और आसपास के इलाकों में बुजुर्गों की आबादी बढ़ने के साथ ही अल्जाइमर और डिमेंशिया के मामले भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि जागरूकता की कमी के कारण अक्सर इलाज में देरी हो जाती है, जिससे बीमारी और बढ़ जाती है। अस्पताल ने आम लोगों से अपील की है कि अगर परिवार के किसी सदस्य में याददाश्त से जुड़ी समस्याएं लगातार बनी रहें, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें। उनका कहना है कि शुरुआती देखभाल से बीमारी की रफ्तार धीमी हो सकती है और मरीजों को एक सम्मानजनक जीवन मिल सकता है。

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