भागलपुर सदर अस्पताल में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए एक विशेष जांच की गई। इस दौरान अधिकारियों ने अस्पताल के विकास और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया और कई महत्वपूर्ण सुधारों को मंजूरी दी।
डीडीसी रवि राकेश के नेतृत्व में समिति ने शुक्रवार को अस्पताल का निरीक्षण किया।
अस्पताल भवन के रंग-रोगन और मरम्मत के कामों को मंजूरी दी गई।
मरीजों के लिए मुफ्त दवा और जांच की सुविधा की पुष्टि की गई।
अगस्त 2026 में रेफर मामलों में 72 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।
अस्पताल में नए विकास कार्यों को मंजूरी
शुक्रवार को उप विकास आयुक्त और रोगी कल्याण समिति के उपाध्यक्ष रवि राकेश के नेतृत्व में एक समिति ने शासी निकाय की बैठक के निर्देशों के बाद भागलपुर में सदर अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण का मुख्य फोकस अस्पताल की इमारतों, स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर था। समिति ने कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिसमें पुराने ओपीडी भवन, विक्टोरिया भवन और एमसीएच भवन के बाहरी हिस्से में पेंटिंग और मरम्मत का काम शामिल है। इसके अलावा एसएनसीयू में फायर एग्जिट का निर्माण, एमसीएच भवन के पास पानी का स्टेशन लगाना और दवा वितरण काउंटर पर रेलिंग लगानी शामिल है।
समिति के सदस्यों ने आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड, जीविका कैंटीन, दवा वितरण काउंटर और एसएनसीयू का मूल्यांकन किया। बातचीत के दौरान, भर्ती मरीजों ने पुष्टि की कि आवश्यक चिकित्सा परीक्षण और दवाएं मुफ्त में प्रदान की जाती हैं, जिससे बाहर से दवाएं खरीदने की आवश्यकता खत्म हो जाती है। वर्तमान में अस्पताल चार दवा वितरण काउंटर संचालित करता है, लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण समिति ने दो और केंद्र खोलने की आवश्यकता पहचानी।
रेफर मामलों में 72 प्रतिशत की भारी गिरावट
चिकित्सा प्रभारी डॉ. राजू ने बताया कि जुलाई 2026 की तुलना में अगस्त 2026 में सदर अस्पताल से मरीजों के रेफर होने के मामलों में 72 प्रतिशत की कमी आई है। यह गिरावट राज्य में दर्ज की गई रेफर संख्या में सबसे बड़ी गिरावट है, जिसे अधिकारियों ने स्वास्थ्य सेवा और उपचार सेवाओं में सुधार का एक प्रमुख संकेतक बताया। इसके अलावा भवन रखरखाव, साफ-सफाई, सुरक्षा और मरीज की सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर भी चर्चा की गई।
निरीक्षण में शामिल अधिकारी
इस निरीक्षण में रोहित पासवान, संजीव कुमार, प्रदीप कुमार सिंह, वंदना तिवारी, नितेश कुमार सिंह, मुकेश राणा, डॉ. गौतम कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, अस्पताल प्रबंधक और अन्य संबंधित अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे।