भागलपुर के पीरपैंती ब्लॉक में स्थित विशाल गांव ने अब शिक्षा के बल पर अपनी पूरी तस्वीर बदल ली है और यह गांव अब पढ़ाई और सफलता का एक बड़ा केंद्र बन गया है। इस बदलाव से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं: तीस दशक पहले इस गांव की पहचान पारंपरिक पेशे से जुड़े होने के कारण थी जिसे लोग कलंक मानते थे। गांव में शिक्षा की शुरुआत सबसे पहले अर्जुन मंडल ने की थी जो 1960 के आसपास गांव के पहले ग्रेजुएट बने थे। सरकारी नौकरी न मिलने पर उन्होंने विशाल और राजगांव के बच्चों को पढ़ाने में अपना जीवन समर्पित कर दिया। साल 1970 के आसपास आदिवासी समुदाय के चंदा किसकु चंद ने बीपीएससी परीक्षा पास की और बाद में रांची से एसएसपी के पद से रिटायर हुए। उनकी इस सफलता ने गांव के युवाओं को पुलिस, प्रशासन, रेलवे, शिक्षा और बैंकिंग में जाने के लिए प्रेरित किया।
गांव के कई युवाओं ने बड़ी सफलता हासिल की जिनमें बिहारी लाल मंडल कस्टम कमिश्नर बने। 1990 के दशक में अभय मंडल कमिश्नर बने, रणधीर मंडल इंजीनियर बने, पवन मंडल डीएसपी बने और सुदर्शन मंडल पुलिस सेवा में आए। इसके अलावा चंद्रकांत मंडल रेलवे स्टेशन मास्टर बने और दीनानाथ मंडल, नागेंद्र मंडल तथा संजय मंडल पुलिस में आए।
सामाजिक बदलाव के साथ-साथ गांव में आर्थिक सुधार भी हुए जहां परिवारों ने झुग्गी-झोपड़ियों से निकलकर पक्के मकान बनाने शुरू किए और इसकी शुरुआत किसान राजेंद्र मंडल ने की थी। स्कूल के हेडमास्टर निर्भय कुमार मंडल ने बताया कि शिक्षा से युवाओं का जीवन और आत्मविश्वास तो बहुत सुधरा है, लेकिन शादी-ब्याह के मामलों में आज भी पुराने समय का कलंक थोड़ा बहुत सामने आ जाता है। इन सब के बावजूद गांव की नई पीढ़ी जैसे मोहित कुमार मंडल आज भी उच्च शिक्षा हासिल करने में लगे हुए हैं। अर्जुन साल 2020 में कोविड-19 के पहले लॉकडाउन के दौरान स्ट्रोक के कारण इस दुनिया से चले गए थे। इस गांव का रिश्ता झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मराबी से भी जुड़ा है क्योंकि उनकी बेटी की शादी चंदा किसकु चंद के परिवार में हुई थी। आज विशाल गांव मजबूती और आगे बढ़ने की एक बड़ी मिसाल बन चुका है जहां लोग अपनी पुरानी पहचान को छोड़कर पढ़ाई और कामयाबी के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।