अनाथ बच्चों के लिए भागलपुर की एक महिला ने गजब का संकल्प लिया है। पवन देवी पिछले 40 साल से लगातार जीवित्पुत्रिका यानी जिउतिया का कठिन व्रत रख रही हैं। इस खबर की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:- पवन देवी ने अपना बचपन रामानंद देवी हिंदू अनाथालय में बिताया था।- यह अनाथालय 20 दिसंबर 1925 को स्थापित हुआ था और 2024 में अपने 100 वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।- पवन देवी इन बच्चों को जन्म नहीं दिया है, लेकिन उनका यह संकल्प उनके मातृप्रेम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है ताकि बच्चों को मां की कमी महसूस न हो।
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जिउतिया व्रत रखा जाता है।
साल 2026 में यह व्रत शनिवार, 3 अक्टूबर को रखा जा रहा है। अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह 7:59 बजे शुरू हुई और 4 अक्टूबर को सुबह 5:51 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि और प्रदोष काल परंपरा के अनुसार, 2 अक्टूबर को 'नहाय-खाय' अनुष्ठान के बाद 3 अक्टूबर को मुख्य व्रत रखा जा रहा है।
बच्ची की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि के लिए महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। स्थानीय पारिवारिक पंचांग के अनुसार 4 अक्टूबर को स्थानीय अष्टमी तिथि समाप्त होने पर पारण किया जाएगा। पवन देवी ने अपने इस व्रत के 40वें वर्ष को पूरा करने के लिए 2 अक्टूबर, शुक्रवार को 'नहाय-खाय' अनुष्ठान किया था। मुंगेर सहित पूरे क्षेत्र में यह व्रत बड़े पैमाने पर मनाया जा रहा है, जहां महिलाओं ने 1 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ अनुष्ठान शुरू किया और 3 अक्टूबर को निर्जला व्रत रखा।