भागलपुर के कला केंद्र में रविवार को 'परिधि' संस्था की ओर से युवा नेतृत्व एवं दृष्टि निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कहलगांव, मक्खातकिया, नवगछिया और भागलपुर शहरी क्षेत्र के लगभग 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से अधिकांश मछुआ समाज से थे। कार्यशाला की मुख्य बातें इस प्रकार हैं: युवाओं की ऊर्जा को संघनित कर परिवर्तनगामी बनाना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है, समाजवाद और लोकतंत्र जैसे विषयों पर समूह चर्चा हुई, संविधान में बराबरी के अधिकारों पर बात की गई।
कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए परिधि के निदेशक उदय ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को संघनित कर परिवर्तनगामी बनाना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। इस प्रक्रिया के तहत लगातार नियमित प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने समाज में प्रचलित विभिन्न शब्दावलियों जैसे समाजवाद, पूंजीवाद, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और रूढ़िवाद आदि विषयों पर विस्तार से समूह चर्चा का संचालन किया।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित गांधी विचार विभाग के प्राध्यापक डॉ. उमेश नीरज ने 'विशेष अवसर' की अवधारणा और इसके लिए संविधान सभा में हुई बहस की विस्तृत चर्चा की।
उन्होंने संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों का जिक्र करते हुए बताया कि हमारे संविधान ने सभी को बराबर अवसर प्रदान करने हेतु कई बार अपने संकल्पों को दोहराया है। डॉ. नीरज ने महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले द्वारा वर्ष 1848 में लड़कियों के लिए स्थापित पहले विद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा गांधी, डॉ. आंबेडकर के पूना पैक्ट से पहले भी कई समाज सुधारकों ने सामाजिक एकता, सम्मान, छुआछूत, जात-पात और धार्मिक अंधविश्वास के खिलाफ आंदोलन चलाए।
लिंग भेद पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप की सामाजिक व्यवस्था पितृसत्तात्मक है।
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के तहत पुत्र और पुत्री दोनों को पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार मिलने के बावजूद समाज आज भी बेटियों को उनका हक देने को तैयार नहीं है। वक्ताओं ने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि किसी व्यक्ति का दायां हाथ मजबूत और बायां हाथ कमजोर हो, परिधि संस्था के इस आयोजन में युवाओं ने भी अपने विचार रखे।