बिहार में डॉक्टरों की हड़ताल: सहर्ष कांड के विरोध में काम ठप, मरीज परेशान

MyBhagalpur Team26 September 20262 min read6 viewsHealth
बिहार में डॉक्टरों की हड़ताल: सहर्ष कांड के विरोध में काम ठप, मरीज परेशान

शनिवार, 26 सितंबर 2026 को, भागलपुर सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने सहरसा की घटना के विरोध में काम का बहिष्कार किया, जिससे चिकित्सा सेवाओं में भारी व्यवधान आया और मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यह कार्रवाई सहरसा में दो डॉक्टरों के निलंबन के जवाब में चिकित्सा पेशेवरों द्वारा शुरू की गई एक व्यापक, राज्यव्यापी हड़ताल का हिस्सा है।

यह अशांति 12 सितंबर 2026 की एक घटना से उपजी है, जिसमें मध्याह्न भोजन खाने के बाद बीमार पड़े बच्चों के इलाज से जुड़ी स्थिति शामिल थी। स्थिति तब और बिगड़ गई जब एक डॉक्टर के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया, जिससे सरकारी कर्तव्यों में बाधा डालने को लेकर टकराव हुआ। घटना के बाद, बिहार हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन (BHSA) ने 19 सितंबर को एक अल्टीमेटम जारी किया, जिसमें प्रभावित डॉक्टरों की सम्मानजनक बहाली की मांग की गई और मांगें पूरी न होने पर काम के बहिष्कार की चेतावनी दी गई। BHSA ने डॉक्टरों के खिलाफ सरकार की दंडात्मक कार्रवाई की आलोचना की है, जिसके बारे में उनका दावा है कि यह मीडिया और प्रशासनिक दबाव में की गई थी।

जांच समिति और अन्य मांगें


23 सितंबर 2026 को, बिहार स्वास्थ्य विभाग ने सहरसा सदर अस्पताल की घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया। साथ ही, BHSA ने अस्पताल के कर्मचारियों में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है और रोगी की गोपनीयता तथा चिकित्सा संचालन के रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए अस्पतालों में पत्रकारों द्वारा वीडियोग्राफी और रिपोर्टिंग के संबंध में स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की मांग की है।

पूरे बिहार में हड़ताल का असर


हड़ताल का प्रभाव पूरे बिहार में व्यापक है। 24 सितंबर को, बेगूसराय में भी डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी, जबकि आरा सिविल सर्जन डॉ. शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने जनता से अपील की कि वे ओपीडी सेवाएं बहाल होने तक अस्पतालों में जाने से बचें। 25 सितंबर तक, सहरसा अस्पताल में आपातकालीन सेवाएं पांच दिनों के लिए ठप हो चुकी थीं। 26 सितंबर की वर्तमान रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि सीतामढ़ी सदर अस्पताल में ओपीडी सेवाएं लगातार तीसरे दिन बंद रहीं, जिससे उत्तेजित मरीजों द्वारा विरोध प्रदर्शन और डॉक्टरों का घेराव किया गया। मोतिहारी और गोपालगंज सहित अन्य जिलों में भी हड़तालें सक्रिय हैं।

नेताओं की प्रतिक्रिया


भारतीय जनता पार्टी (BJP) जिला कार्य समिति के सदस्य डॉ. शशांक सुमन विक्की ने 25 सितंबर को गरीब मरीजों पर हड़ताल के प्रभाव के बारे में चिंता व्यक्त की। विरोध करने के संगठनों के अधिकार को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को पंगु बनाना अनुचित है और चल रहे संकट में BHSA तथा भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) की भूमिकाओं पर सवाल उठाया।

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