कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ मछली पालन में उतरे बिहार के इंजीनियर, अब कमा रहे सालाना 30 लाख
बीटेक इंजीनियर सौरभ ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ मछली पालन को बनाया करियर, अब सालाना 30 लाख का टर्नओवर कर रहे हैं।

अक्सर देखा जाता है कि इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद युवा बड़े शहरों में अच्छी सैलरी वाली नौकरी की तलाश करते हैं, लेकिन बिहार के एक युवा सौरभ ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। बीटेक करने के बाद सौरभ ने एक प्राइवेट कंपनी में चार साल तक काम किया, जहां उन्हें शानदार वेतन मिल रहा था। लेकिन उनके मन में कुछ अलग करने की चाह थी, जिसके कारण उन्होंने अपनी स्थिर नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
शुरुआत में यह फैसला उनके परिवार को बिल्कुल पसंद नहीं आया। घरवाले इस बात से हैरान थे कि एक अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर वह ऐसा कदम क्यों उठा रहे हैं। लेकिन सौरभ अपने इरादों पर अडिग थे और उन्होंने मत्स्य पालन (Fisheries) के क्षेत्र में हाथ आजमाने का फैसला किया। उन्होंने बिना समय गंवाए मत्स्य विभाग से संपर्क किया, तकनीकी बारीकियों को सीखा और पेशेवर ट्रेनिंग ली। साथ ही, उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की पूरी जानकारी जुटाई ताकि वे अपने बिजनेस को सही दिशा दे सकें।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
सौरभ ने दो एकड़ के तालाब से अपने काम की शुरुआत की। शुरुआती दिन आसान नहीं थे; उन्हें मछलियों की देखभाल, तालाब के रखरखाव और बीमारियों से बचाव जैसी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अनुभव से सीखते रहे। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और उनके बिजनेस के नतीजे सुधरने लगे।
सौरभ ने अपनी सोच को और विस्तार देते हुए एक हैचरी स्थापित की, जहां मछली के बीज (Spawn) तैयार किए जाते हैं। पहले बिहार में मछली के बीजों के लिए पश्चिम बंगाल पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन सौरभ ने स्थानीय स्तर पर ही इनका उत्पादन शुरू कर दिया। बीजों की बेहतरीन गुणवत्ता के कारण बाजार में उनकी मांग बढ़ गई, जिससे उनके मुनाफे में भारी इजाफा हुआ।
आज सौरभ के पास लगभग पांच एकड़ में फैले तालाब हैं और उनकी मछली पालन व हैचरी का सालाना टर्नओवर करीब 30 लाख रुपये तक पहुंच गया है। एक कॉर्पोरेट कर्मचारी से ग्रामीण उद्यमी बनने तक का सौरभ का यह सफर उन युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो खेती और उससे जुड़े व्यवसायों में करियर बनाना चाहते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर सही तकनीकी ज्ञान, ट्रेनिंग और धैर्य हो, तो मछली पालन जैसे पारंपरिक काम को भी एक लाभदायक बिजनेस में बदला जा सकता है।