बिहार में बाढ़ की स्थिति बहुत गंभीर हो गई है। राज्य के 14 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और लगभग 35.89 लाख लोग भारी मुसीबत का सामना कर रहे हैं। बाढ़ के पानी ने 491 ग्राम पंचायतों को डुबो दिया है, जिससे पूरे राज्य में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
- बिहार के 14 जिलों में बाढ़ का भीषण संकट
- 35.89 लाख लोग और 491 पंचायतें प्रभावित
- भागलपुर में एनएच-80 पर बह रहा पानी
भागलपुर में गंगा नदी का पानी नेशनल हाईवे-80 के ऊपर आ गया है और सड़क पर करीब दो फीट पानी बह रहा है। खतरनाक हालात को देखते हुए प्रशासन ने इस हाईवे पर गाड़ियों की आवाजाही रोक दी है। भागलपुर के भवनाथपुर चौक पर कई गांवों को जोड़ने वाली ग्रामीण सड़कें तीन से चार फीट पानी में डूबी हैं। तेज बहाव के बावजूद लोग जरूरी सामान और सेवाओं के लिए इस खतरनाक पानी से गुजरने को मजबूर हैं। मुंगेर और भागलपुर की तरफ गंगा का दबाव बढ़ गया है। 5 सितंबर से 8 सितंबर के बीच मुंगेर में जलस्तर 50 सेंटीमीटर बढ़ गया है।
पटना में गंगा और सोन नदियों के जलस्तर में थोड़ी कमी आई है, लेकिन गंगा अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गांधी घाट पर नदी खतरे के स्तर से 1.71 मीटर ऊपर और हाई फ्लड लेवल से 27 सेंटीमीटर नीचे है। दीघा घाट पर जलस्तर खतरे के निशान से 1.09 मीटर ऊपर है और पिछले चार दिनों में 23 सेंटीमीटर घटा है। मनेर में पानी खतरे के स्तर से 1.40 मीटर ऊपर है और इसी अवधि में 15 सेंटीमीटर की गिरावट आई है। पुनपुन नदी भी परेशानी का सबब बनी हुई है, जो श्रीपालपुर में खतरे के निशान से 2.95 मीटर ऊपर बह रही है जो हाई फ्लड लेवल से 36 सेंटीमीटर नीचे है और इससे पटना के दक्षिणी इलाके प्रभावित हो रहे हैं। इसके विपरीत कोईलवर में सोन नदी के जलस्तर में कमी आई है और तीन दिनों में जलस्तर 78 सेंटीमीटर घटकर 53.88 मीटर पर पहुंच गया है। बाढ़ से प्रभावित 14 जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल शामिल हैं। इन बाढ़ों से राज्यभर में 82 प्रशासनिक ब्लॉक प्रभावित हुए हैं।