बिहार में बाढ़ का संकट गंभीर, गंगा खतरे के निशान से ऊपर

MyBhagalpur Team4 September 20262 min read28 viewsBihar
बिहार में बाढ़ का संकट गंभीर, गंगा खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में 4 सितंबर 2026 तक बाढ़ का संकट बहुत बढ़ गया है। गंगा, गंडक, कोसी और सोन नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इस आपदा से सैकड़ों गांव प्रभावित हुए हैं और राज्य के 16 जिलों में बाढ़ आ गई है।

  • बिहार के 16 जिलों में बाढ़ का संकट
  • आठ जिलों में आधिकारिक तौर पर हाई अलर्ट जारी
  • लाखों लोग घरों और खेतों के नुकसान से परेशान

आठ जिलों में हाई अलर्ट

भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद में आधिकारिक तौर पर हाई अलर्ट घोषित किया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने चेतावनी दी है कि गंगा दोपहर तक अपने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर सकती है। पटना में गांधी घाट के पास गंगा खतरे के निशान से 1.65 मीटर ऊपर है। स्थानीय अधिकारियों ने शहर में पानी घुसने से रोकने के लिए सुरक्षा दीवार के सभी 108 गेट बंद कर दिए हैं, हालांकि पटना सिटी में बाढ़ का पानी घरों और निचली सड़कों में भर गया है।

मुंगेर और भागलपुर का हाल

मुंगेर में जलस्तर 38.86 मीटर है, जो खतरे के निशान से सिर्फ 47 सेंटीमीटर नीचे है, जिसके चलते 28 स्कूलों को खाली कराया गया है। भागलपुर में गंभीर कटाव के कारण 100 साल पुराना मंदिर डूब गया है और रधुपुर-काजीकोरिया तटबंध खतरे में है। सोन नदी पर इंद्रपुरी बैराज से पानी का डिस्चार्ज दोपहर 2:00 बजे तक 5.18 लाख क्यूसेक पहुंच गया। सुपौल में कोसी बैराज से 2.22 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जबकि डुमरियाघाट में गंडक नदी खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इसके अलावा, पश्चिमी चंपारण से खबर है कि नेपाल के रसुवा में भोटेकोसी नदी की बाढ़ से गंडक में बहकर आए शवों से सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंता बढ़ गई है।

सरकार और मौसम विभाग की नजर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्थिति की समीक्षा की है और आज प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। उन्होंने राज्य आपदा मोचन बल को आवश्यक सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए हैं। जनता दल (यूनाइटेड) सांसद संजय कुमार झा ने पुष्टि की है कि सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आज 24 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिसमें चार जिलों में अत्यधिक बारिश का खतरा है। विस्थापित हुए लाखों लोगों ने स्कूलों, सड़कों और सामुदायिक भवनों में शरण ली है, जिनके घरों और कृषि भूमि को भारी नुकसान हुआ है।

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