नेपाल के बैराजों से पानी छोड़ने पर बिहार में नदियां उफान पर, बाढ़ का खतरा

MyBhagalpur Team3 September 20262 min read32 viewsBihar
नेपाल के बैराजों से पानी छोड़ने पर बिहार में नदियां उफान पर, बाढ़ का खतरा

बिहार में नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण गंडक, गंगा, कोसी, बागमती, सरयू और सोन नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इस खबर में जानिए बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों से जुड़ी सभी अहम बातें।

बुधवार शाम तक वाल्मिकिनगर बैराज से 1.88 लाख क्यूसेक और सुपौल में कोसी बैराज से 2.22 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। समस्तीपुर में गंगा खतरे के निशान से 1.45 मीटर ऊपर बह रही है। पश्चिमी चंपारण से लेकर भागलपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, सारण, बक्सर और रोहतास तक के इलाके इससे प्रभावित हुए हैं।

नदियों के बढ़ते जलस्तर से तबाही


मधुबनी के रेटाहािया गांव में भीषण नदी कटाव से तीन घर बह गए। चुल्भट्टा, थाड़ी और चकधहवा में भी ऐसा ही खतरा बताया गया है। पूर्वी चंपारण के डुमरियाघाट में गंडक 62.92 मीटर पर पहुंच गई, जो खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर है। गोपालगंज में पिछले 24 घंटों में गंडक नदी में 30 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। कई निचले इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है और फसलें डूब गई हैं।

प्रशासन और मंत्रियों की नजर


सड़क निर्माण मंत्री और बिहपुर विधायक इंजीनियर शैलेंद्र ने बचाव कार्यों की निगरानी के लिए बुधवार को राघोपुर घाट पर स्थिति का जायजा लिया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि भागलपुर में कटाव की स्थिति गंभीर है और नुकसान को कम करने के लिए बड़े स्टीमर तैनात किए गए हैं। उन्होंने कहा कि गंगा के प्रवाह में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और अलर्ट


अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इंद्रपुरी बैराज से पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि गंडक और कोसी बैराज से 1.75 से 2 लाख क्यूसेक पानी आ रहा है। संकट से निपटने के लिए संवेदनशील जिलों में SDRF की 27 और NDRF की 9 टीमें तैनात की गई हैं। पटना, भोजपुर, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल और गया जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। आपदा प्रबंधन प्रधान सचिव संतोष कुमार Mall और जल संसाधन सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने काजीकोरेया-राघोपुर सीमांत बांध का निरीक्षण किया।

अन्य जिलों में भी असर


बांका में बुधवार शाम बहोरना गांव के पास लोहारगढ़ नदी पर बन रहे पुल का डायवर्जन बह गया, जिससे केसर-तारपुर मुख्य मार्ग पर यातायात ठप हो गया। बाढ़ प्रभावित स्कूलों में कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। भागलपुर-नवगछिया में पुरानी रेलवे लाइनों की सुरक्षा के लिए मेगा और जियो-बैग का उपयोग किया जा रहा है और मधेपुरा में सड़कें जलमग्न हैं। सहरसा और सारण के दियारा क्षेत्रों में विस्थापन का खतरा बना हुआ है, जहां गंगा, सरयू, सोन और गंडक के संगम से छह प्रखंड प्रभावित हुए हैं।

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