बर्बाद बिहार के स्कूल! खस्ताहाल इमारतों में बच्चों की जान पर मंडरा रहा खतरा

MyBhagalpur Team2 October 20263 min read0 viewsBihar
बर्बाद बिहार के स्कूल! खस्ताहाल इमारतों में बच्चों की जान पर मंडरा रहा खतरा

बिहार के सरकारी स्कूलों की हालत बहुत खराब है और खस्ताहाल इमारतें बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं। आज तक की एक जांच में सामने आया है कि कई स्कूल खतरनाक हाल में चल रहे हैं। - खगड़िया में स्कूल की सीढ़ियों का मलबा गिरने से 7 साल की ऋतिक कुमारी की मौत हो गई थी। - दरभंगा के किरतपुरा में स्कूल का खंभा टूटने पर छत को बेंच और ईंटों से रोका गया है और बच्चे टीन शेड के नीचे पढ़ रहे हैं। - छपरा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और बेगूसराय में भी स्कूलों की छतें गिर रही हैं और बच्चों को मजबूरी में बरामदे में बैठना पड़ रहा है।

दरभंगा और खगड़िया की डराने वाली स्थिति

खगड़िया में स्कूल की सीढ़ियों का मलबा गिरने से 7 साल की ऋतिक कुमारी की जान चली गई थी। इसके बाद दरभंगा के किरतपुरा में चार से पांच महीने पहले एक स्कूल का खंभा फेल हो गया जिसके बाद प्रशासन ने छत को सहारा देने के लिए बेंच और ईंटों का इस्तेमाल किया। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को अब स्कूल के मैदान में टीन शेड के नीचे पढ़ाया जा रहा है। प्रधानाध्यापक राजेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने ब्लॉक और जिला अधिकारियों को कम से कम पांच या छह बार सूचना दी है लेकिन अभी तक कोई मरम्मत या नया निर्माण नहीं हुआ है। स्थानीय विधायक मैथिली ठाकुर ने भी बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे को उठाया था लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हुआ। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पहले कहा था कि जर्जर इमारतों की रिपोर्ट करने के लिए प्रधानाध्यापक जिम्मेदार हैं और देरी होने पर कार्रवाई की जाएगी जबकि किरतपुरा प्रशासन की रिपोर्ट इससे अलग बात कहती है।

बिहार सरकार का नया अभियान

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में 'सेवा संकल्प और कायाकल्प' अभियान की घोषणा की है। इस अभियान के तहत दो साल के लिए स्कूल सुधारों पर 20,000 करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया गया है। इसमें 30 नवंबर तक छोटे-मोटे सुधार और 31 मार्च तक नए निर्माण करने का लक्ष्य रखा गया है।

राज्यभर के अन्य स्कूलों का बुरा हाल

राज्यभर में इसी तरह की समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। छपरा के रामचंद्र प्रसाद महाशय आर्य शिशु विद्यालय में शिक्षक उपेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि 250 छात्रों के लिए छत का प्लास्टर गिर चुका है और लोहे की जंग लगी छड़ें बाहर दिख रही हैं। लिखित नोटिस देने के बावजूद अभी तक मरम्मत नहीं हुई है। मुजफ्फरपुर के वार्ड 39 में सरकारी प्राथमिक विद्यालय बहलखाना की टिन की छतें टपक रही हैं और दरारें हैं जहां छात्रों को मजबूरन एक ही कमरे में रहना पड़ता है। भागलपुर के सबौर स्थित नवटोलिया प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों विभाकर कुमार और उनके साथियों को जगह की कमी के कारण एक ही कमरे में दो कक्षाएं एक साथ चलानी पड़ती हैं और उन्हें जर्जर छत का सामना भी करना पड़ रहा है। बेगूसराय में उत्क्रमित मध्य विद्यालय बागी के तीन कमरों को आधिकारिक रूप से खंडहर घोषित कर दिया गया है। प्रधानाध्यापक और शिक्षिका कामिनी कुमारी ने बताया कि 413 छात्रों और 15 शिक्षकों के लिए गिरने वाले प्लास्टर से बचने के लिए कक्षाएं अक्सर बरामदे में लगाई जाती हैं और नए भवन के लिए 2017 से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।

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