बिहार के छह जिलों में बाढ़ से भूजल स्तर में भारी सुधार

MyBhagalpur Team30 September 20262 min read1 viewBihar
बिहार के छह जिलों में बाढ़ से भूजल स्तर में भारी सुधार

केंद्रीय भूमि जल बोर्ड यानी सीजीडब्ल्यूबी की नई रिपोर्ट सामने आई है। गंगा से लगे जिलों में हाल ही में आई बाढ़ के कारण भूजल स्तर में अच्छी सुधार देखने को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक मैदानी इलाकों में भारी जलभराव और नदी का जलस्तर बढ़ने सेभागलपुर, मुंगेर, खगड़िया, कटिहार, बेगूसरायऔर कम से कम एक अन्य जिले पर सकारात्मक असर पड़ा है। यहाँ भूजल स्तर में औसतन 2 से 4 मीटर का सुधार हुआ है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग यानी पीएचईडी फिलहाल सीजीडब्ल्यूबी की इन रिपोर्टों की समीक्षा कर रहा है। बाढ़ का पानी पूरी तरह से उतरने के बाद आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन जैसे हानिकारक तत्वों की मौजूदगी का सही पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर नमूने लिए जाएंगे। पीएचईडी के इंजीनियर आने वाले गर्मी के मौसम से पहले नल का जल योजना के लिए रणनीति बनाने में इस डेटा का इस्तेमाल करना चाहते हैं।

भूजल के पुराने आंकड़े और गिरावट

पीएचईडी और सीजीडब्ल्यूबी के इंजीनियर भूजल के रुझान पर नज़र रखने के लिए साल 2021 से 2025 तक के डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। पहले भागलपुर में जमीन के नीचे भूजल स्तर में चिंताजनक गिरावट देखी गई थी। साल 2021 में कम बारिश और बेहिसाब शहरीकरण के कारण कई ब्लॉक पानी की कमी से जूझने लगे थे। तब मानसून से पहले का स्तर औसतन 9 से 11 मीटर नीचे चला गया था। साल 2022 में भूजल का बहुत ज्यादा दोहन होने और तालाबों पर अतिक्रमण के कारण सबौर और सुलतानगंज में जलस्तर गिरकर 11.5 मीटर पर पहुँच गया था। साल 2023 तक दक्षिण भागलपुर के पथरीले और जलोढ़ इलाकों में गर्मियों के दौरान पानी का स्तर 12.3 मीटर नीचे चला गया, जिससे चापानल सूखने लगे थे। आईआईटी हैदराबाद की डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से विश्लेषण किए गए साल 2024 के आंकड़ों से पता चला कि शहरी और ग्रामीण भागलपुर में हर साल गिरावट जारी रही और यह लगभग 12.8 मीटर नीचे पहुँच गया। साल 2025 की शुरुआत तक भूजल स्तर गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर यानी 13.2 मीटर पर पहुँच गया था, जिससे पीने के पानी का बड़ा संकट पैदा होने की चिंता बढ़ गई थी।

प्राकृतिक रूप से हुआ भूजल रीचार्ज

पीएचईडी के अधीक्षण अभियंता संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि इस साल गंगा और उसकी सहायक नदियों में रिकॉर्ड पानी आने से यह प्राकृतिक रूप से भूजल रीचार्ज करने का जरिया बन गया है। उन्होंने बताया कि दियारा और निचले इलाकों में लंबे समय तक पानी भरने से सूखे जलभृत यानी एक्वीफायरों को तेजी से भरने में मदद मिली है।

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