केंद्रीय भूजल बोर्ड यानी CGWB की नई रिपोर्ट के अनुसार गंगा के किनारे वाले जिलों में हाल ही में आई बाढ़ से भूजल स्तर में अच्छी सुधार देखने को मिला है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मैदानी इलाकों में भारी जलभराव और नदियों का जलस्तर बढ़ने से भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया, कटिहार, बेगूसराय और कम से कम एक अन्य जिले पर अच्छा असर पड़ा है और भूजल स्तर में औसतन 2 से 4 मीटर का सुधार हुआ है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग यानी PHED इस रिपोर्ट की समीक्षा कर रहा है। बाढ़ का पानी पूरी तरह उतरने के बाद पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन जैसे हानिकारक तत्वों की जांच के लिए बड़े पैमाने पर नमूने लिए जाएंगे। PHED के इंजीनियर आने वाले गर्मी के मौसम से पहले नल-जल योजनाओं के लिए रणनीति बनाने वास्ते इस डेटा का उपयोग करना चाहते हैं।
PHED और CGWB के इंजीनियर साल 2021 से 2025 तक के डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि भूजल के रुझानों पर नजर रखी जा सके। पहले भागलपुर में जमीन के नीचे यानी BGL भूजल स्तर में चिंताजनक गिरावट आई थी। साल 2021 में मानसून की कमी और अनियंत्रित शहरीकरण के कारण कई ब्लॉक पानी की कमी से जूझने लगे थे और मानसून से पहले का स्तर औसतन 9 से 11 मीटर BGL तक गिर गया था। साल 2022 में भूजल का ज्यादा दोहन और तालाबों पर अतिक्रमण के कारण सबौर और सुल्तानगंज में स्तर गिरकर 11.5 मीटर तक पहुंच गया था। साल 2023 तक दक्षिण भागलपुर के पथरीले और जलोढ़ क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान जलस्तर गिरकर 12.3 मीटर पर आ गया था जिससे चाप कल सूख गए थे।
आईआईटी हैदराबाद की डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली की मदद से विश्लेषण किए गए साल 2024 के डेटा से पता चला कि शहरी और ग्रामीण भागलपुर में हर साल लगातार गिरावट जारी रही और यह लगभग 12.8 मीटर BGL तक पहुंच गया। साल 2025 की शुरुआत तक भूजल स्तर रिकॉर्ड निचले स्तर 13.2 मीटर BGL पर गिर गया था जिससे पीने के पानी के आसन्न संकट की चिंता बढ़ गई थी। PHED के अधीक्षण अभियंता संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि इस साल गंगा और उसकी सहायक नदियों में आया रिकॉर्ड पानी प्राकृतिक भूजल रिचार्ज का जरिया बन गया है। उन्होंने बताया कि दियारा और निचले इलाकों में लंबे समय तक पानी भरने से सूखे जलभृतों को तेजी से भरने में मदद मिली है।