बिहार में बाढ़ और कटाव रोकने के लिए अब होगी हाई-टेक लेजर स्कैनिंग

बिहार सरकार नदियों के कटाव और बाढ़ को रोकने के लिए अब हाई-टेक निगरानी का उपयोग करने जा रही है। जल संसाधन विभाग और खनन विभाग मिलकर एक एक्शन प्लान बना रहे हैं ताकि 'अंडरमाइंडिंग' यानी जमीन के अंदर से हो रहे कटाव का पता लगाया जा सके। भागलपुर में पिछले दस सालों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिसमें खरीक के राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर हाल ही में हुआ टूट शामिल है। इसी के बाद दोनों विभागों के अधिकारियों ने लेजर स्कैनिंग लागू करने के लिए मिलकर काम करना शुरू किया है।
हाई-टेक मशीनों का होगा इस्तेमाल
खनन विभाग द्वारा नदी के तल की निगरानी और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों का अब बाढ़ नियंत्रण के लिए उपयोग किया जाएगा। अधिकारी रियल-टाइम डेटा शेयर करके अचानक तटबंध टूटने से बचाना चाहते हैं। इस प्रोजेक्ट में तीन मुख्य तकनीकें शामिल होंगी:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) जो मिट्टी की परतों को स्कैन करके अंदरूनी खाली जगह का पता लगाएगा।
- सोनार (Sound Navigation and Ranging) तकनीक जो पानी के नीचे होने वाले बदलावों और खतरों पर नजर रखेगी।
- लेजर स्कैनिंग जिससे नदी के किनारों की 3D मैपिंग होगी और कटाव की सही दर का पता चलेगा।
विशेषज्ञों की राय
जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता गोपाल चंद्र मिश्रा ने बताया कि बिहार में पानी का स्तर अचानक बढ़ने से हर साल बहुत आर्थिक नुकसान होता है और लोग बेघर होते हैं। चूंकि यह अंदरूनी कटाव अक्सर दिखाई नहीं देता है, इसलिए यह सिस्टम बाढ़ के मौसम से पहले संवेदनशील जगहों की पहचान करके उन्हें मजबूत करने में मदद करेगा। मुख्य अभियंता जयप्रकाश पासवान ने कहा कि इस तकनीक के इस्तेमाल से राज्य को बाढ़ से होने वाली तबाही से बचाने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।