बिहार इतिहास परिषद का 13वां स्वर्ण जयंती सत्र शनिवार को भागलपुर में शुरू हुआ। देश भर के इतिहासकार, शिक्षक, शोधकर्ता और छात्र इस सम्मेलन में शामिल हुए। बीएन कॉलेज द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में नारीवादी इतिहास लेखन, सांस्कृतिक विरासत और इतिहास शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
प्रोफेसर चारू गुप्ता ने इतिहास और हिंदी साहित्य के मेल पर बात की। उन्होंने सामाजिक अनुभवों को समझने और नारीवादी ऐतिहासिक लेखन में साहित्य की भूमिका पर जोर दिया। खगड़िया सांसद राजेश वर्मा ने बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को याद किया। उन्होंने देश के विकास में बिहार के योगदान और पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की विरासत का जिक्र किया। ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने परिषद के लंबे समय से चल रहे शोध कार्यों की तारीफ की।
पूर्णिया यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर विवेकानंद सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल एक शैक्षणिक उपकरण के रूप में किया जाना चाहिए, लेकिन यह शिक्षकों की जगह नहीं ले सकता। शिक्षक स्रोतों की जांच करने और ऐतिहासिक संदर्भ को समझाने के लिए बहुत जरूरी हैं।
सम्मेलन में दो यादगारी व्याख्यान हुए। प्रोफेसर स्मिता सहगल ने प्रोफेसर राम शरण शर्मा मेमोरियल लेक्चर दिया और प्रोफेसर हितेंद्र पटेल ने प्रोफेसर सुमित सरकार मेमोरियल लेक्चर दिया। इस दौरान कई किताबें भी लॉन्च की गईं। इनमें बिहार इतिहास परिषद की कार्यवाही, प्रोफेसर रामलखन शुक्ल मेमोरियल पुस्तक, डॉ. रवि शंकर कुमार चौधरी की 'मुगल हरम', प्रोफेसर अशोक अंशुमान और अन्य की 'चंपारण में नील संघर्ष के सिपाही', डॉ. शम्मा अंजुम की मुगल काल की प्रभावशाली महिलाओं पर पुस्तक और डॉ. अंशुमान सुमन की आधुनिक विश्व इतिहास की पुस्तक शामिल हैं।
बीएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिरुद्ध कुमार ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर मनोज कुमार ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर दयानंद राय ने दिया। शाम को छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। इस सम्मेलन में परिषद के सचिव प्रोफेसर दयानंद राय, प्रोफेसर अमरकांत सिंह, संयुक्त सचिव प्रोफेसर केके मंडल, संरक्षक प्रोफेसर विश्वंभर झा और प्रोफेसर रेणु कुमारी सहित दिल्ली यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों के कई प्रतिनिधि शामिल हुए।