बड़ी खबर: भागलपुर में शरणार्थियों की जमीन का अवैध आवंटन, मंत्री ने दिए जांच के आदेश

बिहार के राजस्व और भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए शरणार्थियों के लिए तय जमीन के अवैध वितरण में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है। यह निर्देश धार्मिक उत्पीड़न के कारण 1959 में भारत आए शरणार्थी आवेदक शंकर राजवंशा द्वारा दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के बाद आया है। शिकायत के अनुसार, बिहार और केंद्र सरकार ने शरणार्थी पुनर्वास के लिए पीरपैंती अंचल के मौजा मानिकपुर (थाना संख्या 84) और मौजा टुंडवा उर्फ मुंडवा (थाना संख्या 85) में लगभग 11 एकड़ और 73 डिसमिल जमीन का अधिग्रहण किया था। आधिकारिक नीति के अनुसार प्रत्येक पात्र शरणार्थी परिवार को 2 एकड़ कृषि भूमि और 12.5 डिसमिल आवासीय भूमि मिलना अनिवार्य था। राजवंशा का आरोप है कि पात्र परिवारों को कभी उनकी पूरी जमीन नहीं मिली और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने अपात्र लोगों को अवैध भूमि बंदोबस्ती प्रमाण पत्र (पर्चे) जारी कर दिए। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि पूर्व अनुमंडल अधिकारियों (एसडीओ) और अंचल अधिकारियों (सीओ) ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर भूखंडों पर अवैध कब्जा करने में मदद की। जांच में पता चला कि सीओ द्वारा 'भूमिहीन' बताए गए कई व्यक्ति वास्तव में स्थापित जमीन और मकान मालिक थे। मंत्री जायसवाल ने आवश्यक कार्रवाई के लिए आवेदन को जिला मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया है। राजवंशा के वकील शिवशंकर चौबे ने बताया कि याचिकाकर्ता ने बिहार भूमि न्यायाधिकरण (बीएलटी) के समक्ष अंतरिम आवेदन संख्या 245/2026 दायर किया है। न्यायाधिकरण ने आवेदन स्वीकार कर लिया है और वर्तमान मंडलीय आयुक्त को याचिका में उठाए गए सभी बिंदुओं पर विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है।