जमीन विवाद में अब पुलिस नहीं कर सकेगी दखल, बिहार सरकार का नया नियम 1 फरवरी से लागू

Lov Singh2 February 20262 min read55 viewsBihar
जमीन विवाद में अब पुलिस नहीं कर सकेगी दखल, बिहार सरकार का नया नियम 1 फरवरी से लागू

बिहार सरकार ने जमीन विवाद से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है। उप मुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. विजय कुमार सिन्हा ने ऐलान किया है कि अब पुलिस सीधे तौर पर जमीन विवाद में दखल नहीं देगी। यह नया नियम 1 फरवरी 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी हो गया है। गृह विभाग और राजस्व विभाग ने संयुक्त रूप से सभी जिलों को आदेश जारी कर दिया है कि पुलिस का काम अब सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखना होगा, न कि जमीनी मसलों को सुलझाना।

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अब पुलिस क्या नहीं कर सकेगी

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नए आदेश के मुताबिक, पुलिस अब किसी भी जमीन पर कब्जा दिलाने, बाउंड्री वॉल बनवाने या निर्माण कार्य करवाने जैसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। अक्सर यह शिकायत मिलती थी कि पुलिस सिविल मामलों में मनमाने ढंग से दखल दे रही है, जिसे अब पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। पुलिस को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे सक्षम प्राधिकार के आदेश के बिना किसी भी जमीन विवाद में कार्रवाई न करें। अगर कोई पुलिसकर्मी नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो उस पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। धारा 107 और 116 का इस्तेमाल केवल शांति बनाए रखने के लिए होगा।

थाने में शिकायत दर्ज करने की नई प्रक्रिया

सरकार ने जमीन विवाद की रिपोर्टिंग के तरीके को भी पारदर्शी बना दिया है। अब थाने में आने वाले हर जमीन विवाद को स्टेशन डायरी में दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसमें आधी-अधूरी जानकारी नहीं चलेगी, बल्कि पूरा ब्योरा देना होगा।

  • डायरी में दोनों पक्षों का नाम और पूरा पता लिखा जाएगा।
  • जमीन का पूरा विवरण जैसे खाता, खसरा, रकबा और जमीन की किस्म दर्ज करनी होगी।
  • यह भी बताना होगा कि मामला किस राजस्व कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।
  • थानेदार को हर मामले की लिखित जानकारी अंचलाधिकारी (CO) को ईमेल या विभागीय पोर्टल के जरिए भेजनी होगी।

हर शनिवार को होगी समीक्षा बैठक

जमीन विवादों के बेहतर निपटारे के लिए पुलिस और राजस्व विभाग के बीच तालमेल बढ़ाया जाएगा। इसके लिए हर शनिवार को अंचल कार्यालय में एक जरूरी बैठक तय की गई है। इस बैठक में अंचलाधिकारी (CO) और थानाध्यक्ष (SHO) मौजूद रहेंगे और दर्ज मामलों की समीक्षा करेंगे। अगर थानाध्यक्ष किसी कारण से नहीं आ पाते हैं, तो अपर थानाध्यक्ष को बैठक में शामिल होना होगा। इस बैठक में हुई प्रगति की रिपोर्ट विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी ताकि वरीय अधिकारी इसकी निगरानी कर सकें।

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