बिहार पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के सभी जिलों में मिलने वाली लावारिस लाशों की पहचान और पुलिस की संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए एक नई गाइडलाइन यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया है। इस नए नियम के तहत पुलिस को किसी भी लावारिस लाश के मिलने की सूचना थाने की सनहा या डेली डायरी में दर्ज करनी होगी। मामले के थानेदार या जांच अधिकारी को खुद मौके पर जाकर घटनास्थल का निरीक्षण करना होगा।
बिहार पुलिस मुख्यालय के नए नियमों के मुताबिक जांच अधिकारियों को कुछ खास कदम उठाने होंगे।
पुलिस को मृतक के कपड़ों की जांच करनी होगी और दर्जी के लेबल को देखना होगा ताकि कोई सुराग मिल सके। इसके अलावा घटनास्थल की जांच फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) के विशेषज्ञों से करवानी होगी। जांच अधिकारियों को उंगलियों के निशान लेने होंगे और चेहरे व जन्मजात निशानों की साफ तस्वीरें खींचनी होंगी।
जरूरत पड़ने पर लावारिस शव का डीएनए सैंपल भी सुरक्षित रखना होगा।
मृतक के पास मिले सभी गहने और सामान को जब्त करके सुरक्षित रखना होगा। पुलिस आसपास के इलाके में सुराग तलाशेगी और सोशल मीडिया, CCTNS तथा लोकल व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए मृतक के हुलिया की जानकारी शेयर करेगी। अगर 72 घंटे तक लाश की पहचान नहीं होती है, तो जांच अधिकारी को एसपी को रिपोर्ट देनी होगी।