Bihar Govt New Policy: शराबबंदी कानून में बड़ा बदलाव, जब्त गाड़ी और जमीन पर 90 दिन में होगा फैसला

Hariom Mishra7 February 20262 min read35 viewsBihar
Bihar Govt New Policy: शराबबंदी कानून में बड़ा बदलाव, जब्त गाड़ी और जमीन पर 90 दिन में होगा फैसला

बिहार सरकार के मद्य निषेध और उत्पाद विभाग ने शराबबंदी कानून के तहत जब्त की गई गाड़ियों और जमीन को लेकर एक नया और स्पष्ट आदेश जारी किया है। विभाग ने 7 फरवरी 2026 को नया SOP (Standard Operating Procedure) लागू कर दिया है, जिससे अब पूरे राज्य में एक समान प्रक्रिया अपनाई जाएगी। अब अधिकारियों को जब्त संपत्ति पर अनिश्चितकाल तक फाइल दबाकर रखने की छूट नहीं मिलेगी, बल्कि एक तय समय सीमा के भीतर फैसला लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

गाड़ियों और जमीन की जब्ती पर क्या है नया नियम?

नए नियमों के मुताबिक, शराब मामले में जब्त की गई गाड़ी या जमीन को लेकर अब 30 से 90 दिनों के भीतर अंतिम फैसला लेना होगा। जिला मजिस्ट्रेट (DM) को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस समय सीमा के अंदर यह तय हो जाए कि संपत्ति को जब्त करना है या छोड़ना है। सबसे अहम बात यह है कि कोई भी फैसला लेने से पहले संपत्ति के मालिक को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें नोटिस भेजा जाएगा और सुनवाई की तारीख तय होगी।

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परिवहन पदाधिकारी (DTO) को भी जब्त गाड़ी की रिपोर्ट समय पर देनी होगी। अगर गाड़ी मालिक जुर्माना भरने को तैयार है और नियम इसकी इजाजत देते हैं, तो प्रक्रिया को लटकाया नहीं जाएगा। पहले कई मामलों में देखा गया था कि गाड़ियां थानों में सड़ती रहती थीं, लेकिन अब अधिकारियों को तेजी दिखानी होगी और पारदर्शिता रखनी होगी ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

जब्त शराब को नष्ट करने की क्या प्रक्रिया होगी?

अक्सर थानों और गोदामों में जब्त शराब का स्टॉक जमा हो जाता था, जिससे कई तरह की गड़बड़ी की आशंका रहती थी। नए SOP में साफ कहा गया है कि जब्त की गई शराब को 15 दिनों के अंदर नष्ट करना होगा। जैसे ही केमिकल जांच की रिपोर्ट आती है, उसके तुरंत बाद इसे नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। शराब को लंबे समय तक स्टोर करके रखना अब मना है ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके।

शराब को नष्ट करते समय पारदर्शिता रखना सबसे जरूरी है। इसके लिए पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी। यह काम कार्यपालक दंडाधिकारी (Executive Magistrate) की मौजूदगी में ही होगा। इसके अलावा, जब्त शराब का पूरा हिसाब ब्रांड के अनुसार रजिस्टर में दर्ज करना होगा। जांच के लिए दो सैंपल लिए जाएंगे, एक लैब जाएगा और दूसरा सबूत के तौर पर सुरक्षित ऑफिस में रखा जाएगा।

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