बिहार के लखीसराय जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों को आपदा से निपटने के लिए तैयार करने के लिए एक पहल के तहत 'Safe Saturday' कार्यक्रम चलाया जा रहा है। कजरा से वैदेही शरण द्वारा रिपोर्ट किए गए इस अभियान का उद्देश्य छात्रों को प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों तरह की आपदाओं से सावधानी के साथ निपटने के लिए व्यावहारिक ज्ञान देना है।
- साप्ताहिक कार्यक्रम में भूकंप, बाढ़, डूबने की घटना, आग, बिजली गिरने, बिजली के करंट, सड़क और रेल सुरक्षा के उपाय सिखाए जाते हैं।
- छात्रों को आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पहचानने और बिना अपनी जान खतरे में डाले दूसरों की मदद करने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
- भूकंप से बचाव के लिए 'ड्रॉप, कवर और होल्ड' तकनीक का अभ्यास कराया जाता है।
बच्चों को मजबूत फर्नीचर के नीचे छिपने और कंपन रुकने पर खुले, सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया जाता है, जबकि जर्जर इमारतों, बिजली के खंभों, तारों और पेड़ों से दूर रहने को कहा जाता है। बाढ़ और डूबने के संबंध में, बच्चों को गहरे पानी के स्रोतों और तेज धाराओं से दूर रहने की सलाह दी जाती है। किसी डूबते हुए व्यक्ति को बचाते समय उन्हें सीधे पानी में न उतरने बल्कि रस्सी या बांस जैसे उपकरणों का उपयोग करने की चेतावनी दी जाती है।
सड़क और रेल सुरक्षा प्रशिक्षण में ट्रैफिक संकेतों को देखना, सड़क पार करना, खेल के लिए रेलवे पटरियों से बचना और चलती ट्रेनों में चढ़ने या उतरने से बचना शामिल है। आग और बिजली से सुरक्षा के लिए, छात्रों को धुएं से बचने के लिए झुककर आग के दौरान इमारतों से बाहर निकलने और तुरंत इसकी सूचना देने का पाठ पढ़ाया जाता है। उन्हें पीड़ित को सीधे छूने के बजाय बिजली के झटके से प्रभावित किसी भी व्यक्ति की मदद करने से पहले बिजली के स्रोतों को बंद करने की चेतावनी भी दी जाती है।
कई स्कूल चोटों या जलने की घटनाओं से निपटने का व्यावहारिक अनुभव देने के लिए मॉक ड्रिल कराते हैं। शिक्षा विभाग की इस पहल का उद्देश्य सैद्धांतिक शिक्षा से आगे बढ़कर जिम्मेदारी और सतर्कता की भावना पैदा करना है, जिससे छात्रों को प्रभावी ढंग से आपदा-जागरूक नागरिक बनाया जा सके।