किशनगंज: आस्था का केंद्र बना धेक्सरा काली मंदिर, 54 वर्षों से पूरी हो रही भक्तों की मुरादें
किशनगंज के धेक्सरा काली मंदिर की अनोखी कहानी, जहां एक सपने ने बदल दी इलाके की तस्वीर। जानें इस मंदिर का इतिहास।

बिहार के किशनगंज शहर के पास टेउसा पंचायत में स्थित धेक्सरा काली मंदिर आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक बन चुका है। पिछले 54 वर्षों से यह मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए विश्वास का केंद्र है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भी भक्त यहाँ सच्चे मन से प्रार्थना करता है, माँ काली उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करती हैं।
इस मंदिर की स्थापना के पीछे एक दिलचस्प और आध्यात्मिक कहानी है। बताया जाता है कि यह पूरा इलाका पहले घना जंगल हुआ करता था। यहाँ के निवासी स्वर्गीय लक्ष्मण साहनी को एक दिव्य सपना आया, जिसमें उन्हें इस स्थान पर माँ काली की सेवा और पूजा करने का निर्देश मिला। इसी ईश्वरीय संकेत के बाद उन्होंने यहाँ पूजा की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में यह पूजा एक साधारण झोपड़ी में होती थी, जहाँ उत्सव के दौरान माँ की प्रतिमा स्थापित की जाती थी और अगले दिन उसे नदी में विसर्जित कर दिया जाता था।
झोपड़ी से भव्य मंदिर तक का सफर
लक्ष्मण साहनी के बाद उनके पुत्र स्वर्गीय रामचंद्र ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे स्थानीय समुदाय का समर्थन मिला और आस्था का यह केंद्र बड़ा होता गया। साल 1990 में शहरवासियों की मदद से यहाँ एक स्थायी ढांचे का निर्माण हुआ, जो समय के साथ एक भव्य मंदिर में तब्दील हो गया। साल 2015 से यहाँ माँ काली की प्रतिमा स्थायी रूप से स्थापित कर दी गई है, जिससे अब साल भर भक्त यहाँ दर्शन कर सकते हैं।
मंदिर के चारों ओर का वातावरण बेहद सुकून देने वाला है। मंदिर के आगे और पीछे फैले हरे-भरे चाय के बागान इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाते हैं। वर्तमान में इस मंदिर की देखरेख स्वर्गीय रामचंद्र के परिवार और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा की जा रही है।
इस परिसर की खास बात यह है कि यहाँ केवल माँ काली ही नहीं, बल्कि अन्य देवी-देवताओं के भी मंदिर हैं। यहाँ माँ दुर्गा, भगवान शिव, भैरव बाबा और बजरंगबली के मंदिर स्थित हैं। विशेष रूप से शिवरात्रि के अवसर पर यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है, जब शहर के भूतनाथ गौशाला मंदिर से निकलने वाली शिव बारात इसी परिसर के शिव मंदिर में आकर संपन्न होती है।