भागलपुर के बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। बाढ़ का पानी तो स्थिर हुआ है, लेकिन इसके घटने की रफ्तार बेहद धीमी है।
- जनजीवन पूरी तरह ठप है और आवागमन का एकमात्र साधन नाव है।
- दियारा क्षेत्र के किसानों के सामने भुखमरी और आर्थिक तबाही का संकट है।
- मक्का, धान, मिर्च और मौसमी सब्जियों की फसलें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं।
केवल पीरपैंती प्रखंड की 18 पंचायतों में लगभग 56 सौ हेक्टेयर में लगी फसल पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ चुकी है। मोहनपुर मधुबन के किसान इन्द्रदेव मंडल और बाखरपुर के चरितर मंडल ने बताया कि बाढ़ ने मेहनत पर पानी फेर दिया है और मक्का व मिर्च की फसलें सड़ चुकी हैं। दियारा क्षेत्र में खेती करना हर साल जुआ खेलने जैसा हो गया है।
स्थानीय किसानों ने बताया कि अधिकांश किसान किसान क्रेडिट कार्ड और महाजनों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेकर खेती करते हैं।
हर साल बाढ़ की विभीषिका किसानों को कर्ज के दलदल में धकेल देती है। इस बार फसल नष्ट होने से खेत की जोताई, खाद और मजदूरों की मजदूरी तक की कीमत चुकता कर पाना नामुमकिन हो गया है। सबसे गहरा जख्म बटाईदारी पर खेती करने वाले किसानों को मिला है, जिनके पास अब न तो खाने को अनाज है और न अगली फसल के लिए पूंजी। किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से फसलों के नुकसान का उचित आकलन कराने, ऋण माफी, उचित मुआवजा और मुफ्त बीज व खाद दिए जाने की मांग की है।