अद्भुत मिसाल: सरकारी गाड़ी छोड़ नंगे पांव बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचीं डीएम अलंकृता पांडे

गंगा के बढ़ते जलस्तर से भागलपुर जिले में बाढ़ की भीषण त्रासदी आ गई है। संकट के इस दौर में प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। जिले की जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने दफ्तर छोड़कर सीधे बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पहुंचने का फैसला किया है।
भागलपुर में बाढ़ के हालात से जुड़ी मुख्य बातें:
- जिले की 86 से अधिक पंचायतों में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है।
- नवगछिया, शाहकुंड और भागलपुर के शहरी इलाकों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है।
- डीएम अलंकृता पांडे ट्रैक्टर और नंगे पांव कमर तक पानी में घुसकर पीड़ितों तक पहुंचीं।
- शाहकुंड की अंचलाधिकारी हर्षा कोमल भी इस मुहिम में उनके साथ रहीं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा
उल्लेखनीय है कि बाढ़ के कारण जिले की 86 से अधिक पंचायतों में हाहाकार मचा हुआ है। नवगछिया, शाहकुंड और भागलपुर के शहरी इलाकों सहित कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह कट चुका है। सामान्य वाहनों का इन इलाकों में जाना नामुमकिन हो गया है। लेकिन इन बाधाओं को दरकिनार करते हुए डीएम अलंकृता पांडे खुद ग्राउंड जीरो पर उतरीं। जहां सड़कें पानी में डूब चुकी थीं, वहां उन्होंने ट्रैक्टर को अपनी सरकारी गाड़ी बनाया और जहां पानी और गहरा था, वहां वह नंगे पांव कमर तक पानी में घुसकर पीड़ितों तक सहायता पहुंचाने निकल पड़ीं। उनके साथ शाहकुंड की अंचलाधिकारी (सीओ) हर्षा कोमल भी इस मुहिम में कंधे से कंधा मिलाकर डटी रहीं。
अधिकारियों द्वारा राहत कार्य और निर्देश
डीएम अलंकृता पांडे ने सिर्फ प्रभावित इलाकों का ऊपरी मुआयना नहीं किया, बल्कि पानी के बीच फंसे परिवारों के पास जाकर खुद उनकी समस्याएं सुनीं। प्रशासनिक टीम के साथ लगातार निगरानी करते हुए उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि राहत सामग्री और बुनियादी जरूरतें हर प्रभावित व्यक्ति तक बिना किसी देरी के पहुंचें। वहीं शाहकुंड की अंचलाधिकारी हर्षा कोमल ने शाहकुंड प्रखंड के खुलनी, पैरडो मोमिन्या माल, बेलथू, खैरा, मकंदपुर और दरियापुर जैसी अत्यधिक प्रभावित पंचायतों में प्रशासनिक टीम के साथ खुद पहुंचकर लोगों का ढांढस बंधाया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने मौके पर ही अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़े और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आपदा की इस घड़ी में कागजी खानापूर्ति के बजाय राहत कार्य धरातल पर दिखने चाहिए।