जमुई से सुधांशु की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व खाद्य दिवस पर मुंगेर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग के सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर और राजगीर डिग्री कॉलेज, इस्लामनगर, अलीगंज के प्रिंसिपल डॉ. गौरी शंकर पासवान ने भूख, कुपोषण और गरीबी को दूर करने की सख्त जरूरत पर जोर दिया है।
- डॉ. पासवान ने बताया कि हर साल 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है।
- उन्होंने कहा कि पर्याप्त और पौष्टिक भोजन के बिना स्वस्थ समाज और मजबूत देश नहीं बन सकता।
- संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में दुनिया भर में लगभग 73.3 करोड़ लोग भूख से पीड़ित थे।
डॉ. पासवान ने बताया कि
विश्व खाद्य दिवस का मकसद भूख खत्म करने के लिए वैश्विक प्रयास बढ़ाना है ताकि हर व्यक्ति को पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक खाना मिल सके। उन्होंने बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों की वकालत करते हुए कहा कि बच्चों को हेल्दी खाना देना देश के भविष्य में निवेश करने जैसा है। उन्होंने सामाजिक असमानता पर चिंता जताई और कहा कि एक तरफ कुछ लोग खाना फेंकते हैं, तो दूसरी तरफ कुछ लोग भूखे सोते हैं। उन्होंने संसाधनों के समान वितरण और संवेदनशीलता की मांग की।
डॉ. पासवान ने गरीबी को कोई अभिशाप नहीं बताया, बल्कि इसे एक ऐसी चुनौती कहा जिसे
सामूहिक प्रयासों से दूर किया जा सकता है। उन्होंने खाना बर्बाद करना बंद करने की अपील की और कहा कि मानव सभ्यता की असली सफलता केवल आर्थिक समृद्धि में नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने में है कि दुनिया में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए।