गंगोत्री से बिहार और झारखंड होते हुए फरक्का बैराज तक आ रहा पानी ठीक से निकल नहीं पा रहा है, जिससे बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में बाढ़ की गंभीर स्थिति बन गई है। नदी के तल में भारी गाद जमने और पश्चिम बंगाल में नीचे की ओर पानी का स्तर अधिक होने से 'बैकवाटर इफेक्ट' पैदा हो गया है। इससे पानी का बाहर निकलना बहुत मुश्किल हो गया है और भागलपुर तथा आसपास के जिलों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में बहुत अधिक बारिश होने से नीचे की स्थिति और खराब हो गई है।
दबाव को संभालने के लिए अधिकारियों ने फरक्का बैराज के सभी 109 गेट खोल दिए हैं, जिससे 11.5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है। इसके बाद भी बैराज पर पानी का दबाव बहुत ज्यादा है और पानी निकलने की रफ्तार काफी धीमी है। मंगलवार शाम तक फरक्का बैराज पर पानी का स्तर 23.62 मीटर दर्ज किया गया, जो 22.25 मीटर के खतरे के निशान से 1.37 मीटर ऊपर है। पिछले 24 घंटों में इसमें 13 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। इस जगह पर सबसे ज्यादा बाढ़ का स्तर (HFL) 1998 में 25.14 मीटर दर्ज किया गया था।
पटना स्थित जल संसाधन विभाग के फ्लड कंट्रोल सेल (FCC) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच दिनों में पानी का स्तर इस प्रकार रहा: 7 सितंबर को 23.49 मीटर, 6 सितंबर को 23.33 मीटर, 5 सितंबर को 23.10 मीटर, 4 सितंबर को 22.98 मीटर और 3 सितंबर को 22.79 मीटर।
इंजीनियरों ने बताया है कि भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुआ 30 साल पुराना गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म होने वाला है। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि अगर गाद जमने की समस्या को ठीक किए बिना इस संधि को फिर से बढ़ाया गया, तो बिहार में बाढ़ की समस्या अगले 30 साल तक बनी रहेगी। मुख्य अभियंता जयप्रकाश पासवान ने बताया कि भले ही सभी गेट खुले हैं, लेकिन पानी निकलने की रफ्तार धीमी है। बैराज का दबाव कम होने और भागलपुर से बाढ़ का पानी तेजी से घटने में अभी दो से चार दिन और लगेंगे।