बाढ़ की गाद से बढ़ाएं खेत की उपजाऊ शक्ति

MyBhagalpur Team20 September 20261 min read3 viewsDevelopment and good news
बाढ़ की गाद से बढ़ाएं खेत की उपजाऊ शक्ति

कटेहार में बाढ़ के पानी के साथ खेतों में आने वाली प्राकृतिक नदीय गाद किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। कृषि विभाग के अनुसार, यह गाद मिट्टी की उपजाऊ शक्ति और गुणवत्ता सुधारने का एक बेहतरीन प्राकृतिक जरिया है।

बाढ़ के पानी के साथ खेतों में जमा होने वाली प्राकृतिक नदीय गाद केवल नुकसान नहीं करती, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और संरचना सुधारने में मदद करती है। जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि वे बाढ़ के बाद खेतों में जमा गाद को आपदा न समझें। स्वच्छ नदीय गाद में महीन खनिज कण, कार्बनिक पदार्थ और पोषक तत्व होते हैं जो मिट्टी की बनावट सुधारते हैं।

मिट्टी की उर्वरता के लिए वरदान


यह गाद मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाने और कटाव ग्रस्त ऊपरी परत के पुनर्निर्माण में मदद करती है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों के लिए अनुकूल वातावरण बनता है। पानी सूखने के बाद स्वच्छ गाद को खेत की मिट्टी में अच्छी तरह मिला देना चाहिए।

बिना मृदा परीक्षण रासायनिक खादों से बचें


गाद जमा होने के बाद बिना सोचे-समझे यूरिया, डीएपी या अन्य रासायनिक उर्वरक न डालें। रबी या अन्य फसलों की बुआई से पहले खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं। परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद ही संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग करें।

प्रदूषित गाद से रहें सावधान


हर प्रकार की गाद खेत के लिए मुफीद नहीं होती है। यदि गाद औद्योगिक नाले या प्रदूषित जलस्रोत से आई है, तो उसमें विषैले रसायन हो सकते हैं। ऐसी गाद का उपयोग बिना जांच के बिल्कुल न करें। किसान पहले जल निकासी सुनिश्चित करें और वैज्ञानिक सलाह के आधार पर फसल चुनें।

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