फॉरबिस्गंज: व्यवसायी गौरी शंकर भगत ने नेत्रदान कर तीन लोगों को दी नई रोशनी
फॉरबिस्गंज के व्यवसायी गौरी शंकर भगत ने नेत्रदान कर तीन लोगों को रोशनी दी। समिति ने परिजनों को सम्मानित कर इस नेक कार्य की सराहना की।

पूर्णिया जिले के फॉरबिस्गंज में मानवता की एक मिसाल पेश की गई है। शहर के जाने-माने 85 वर्षीय व्यवसायी गौरी शंकर भगत के निधन के बाद उनके परिवार ने उनकी आंखें दान करने का फैसला किया। इस नेक कार्य के जरिए तीन नेत्रहीन लोगों के जीवन में रोशनी वापस आएगी। इस महान निर्णय के सम्मान में दधीचि देहदान समिति और तेरापंथ युवक परिषद चक्षुदान समिति ने उनके निवास पर एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दधीचि देहदान समिति के जिला अध्यक्ष अजातशत्रु अग्रवाल ने स्वर्गीय भगत को पुष्प अर्पित कर की। इस दौरान समिति की ओर से एक प्रशंसा पत्र पढ़कर सुनाया गया और परिवार के सदस्यों—बेटे विकास और नितिन भगत, बहुओं निधि और रीता भगत, तथा बेटियों सीमा गुप्ता और स्वाति जायसवाल को शॉल, स्कार्फ और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
नेत्रदान से बदल रही है तस्वीर, पटना के बाद दूसरा बड़ा शहर बना फॉरबिस्गंज
समारोह को संबोधित करते हुए अजातशत्रु अग्रवाल ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पटना के बाद फॉरबिस्गंज राज्य का दूसरा ऐसा शहर बन गया है जहां नेत्रदान की संख्या सबसे अधिक है। अब तक यहां 28 सफल नेत्रदान हुए हैं, जिससे पांच दर्जन से अधिक दृष्टिहीन लोगों को नई रोशनी मिली है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य है।
इस मौके पर नितिन भगत ने समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि नेत्रदान की प्रक्रिया में पूरी आंख नहीं निकाली जाती, बल्कि केवल कॉर्निया (cornea) का संग्रह किया जाता है। उन्होंने इस कार्य में सहयोग के लिए दधीचि देहदान समिति, तेरापंथ युवक परिषद और कलवार सेवा ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन राहुल ठाकुर ने किया। इस अवसर पर बछराज राखेचा, मांगीलाल गोलछा, विनोद सेठिया, डॉ. अंजु प्रभात, पार्षद बुलबुल यादव, मोहम्मद इस्लाम, मनोज सिंह और कलवार सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष सीताराम भगत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।