गंगा की गाद से थमेगा भीषण कटाव, जिले के तीन बड़े फोरलेन प्रोजेक्ट्स को मिलेगी मुफ्त मिट्टी

केंद्र और बिहार सरकार के 'नदी संजीवनी' कार्यक्रम से भागलपुर में गंगा की गाद निकाली जाएगी, जिससे कटाव रुकेगा और हाईवे प्रोजेक्ट्स को मिलेगी मिट्टी।

Ishita Kumari5 November 20262 min read0 viewsDevelopment and good news
गंगा की गाद से थमेगा भीषण कटाव, जिले के तीन बड़े फोरलेन प्रोजेक्ट्स को मिलेगी मुफ्त मिट्टी

बिहार के भागलपुर जिले के लिए एक ऐसी खबर आई है जो आने वाले समय में लाखों लोगों की जिंदगी बदल सकती है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच हुए एक नए समझौते ने नदी के कटाव और बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे इस इलाके के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है। 'नदी संजीवनी' कार्यक्रम के तहत अब गंगा नदी से वैज्ञानिक तरीके से भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) निकाली जाएगी, जिससे न केवल नदी का स्वरूप बदलेगा बल्कि सड़क निर्माण के बड़े प्रोजेक्ट्स को भी नई रफ्तार मिलेगी।

दरअसल, जल संसाधन विशेषज्ञों का मानना है कि बक्सर और पटना की तुलना में भागलपुर और कटिहार तक आते-आते गंगा में गाद इतनी जमा हो जाती है कि नदी की चौड़ाई बढ़कर 38 से 40 किलोमीटर तक पहुंच जाती है। नदी के उथले होने की वजह से पानी का प्राकृतिक बहाव रुक जाता है, जिसके कारण नदी अपना रास्ता बदलकर किनारों को तेजी से काटने लगती है। इसका असर खरीक, नवगछिया, गोपालपुर, नाथनगर और सुल्तानगंज जैसे इलाकों में साफ दिखता है, जहां हर साल बाढ़ और कटाव से हजारों लोग बेघर हो जाते हैं।

इन बड़े प्रोजेक्ट्स में होगा गाद का इस्तेमाल

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इस योजना की सबसे खास बात यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) गंगा से निकाली गई इस गाद का इस्तेमाल मुफ्त में करेगा। इससे मिट्टी की कमी दूर होगी और निर्माण कार्य तेजी से पूरे होंगे। मुख्य रूप से इन प्रोजेक्ट्स को इसका लाभ मिलेगा:

  • भागलपुर बाईपास - रसलपुर फोरलेन: इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर भराव के लिए मिट्टी की जरूरत थी, जो अब गाद से पूरी होगी।
  • मुंगेर - मिर्जाचौकी फोरलेन: जिले की लाइफलाइन माने जाने वाले इस कॉरिडोर के निर्माण को अब नई गति मिलेगी।
  • भागलपुर - खड़हरा (ढाका मोड़) फोरलेन: बांका और संताल परगना को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण रूट में भी इसी गाद का उपयोग किया जाएगा।
  • मणिकपुर - साहेबगंज फोरलेन: इस मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए गाद एक बेहतरीन विकल्प साबित होगी।

ड्रेजिंग होने से नदी की गहराई बढ़ेगी और पानी मुख्य धारा में बहेगा, जिससे तटबंधों पर दबाव कम होगा। खरीक के ग्रामीणों का कहना है कि हर साल उनके घर और खेत गंगा में समा जाते हैं। अगर यह वैज्ञानिक तरीका सफल रहा, तो यह उनके जीवन की सबसे बड़ी राहत होगी। अब उम्मीद है कि राघोपुर मार्जिनल बांध और भवनाथपुर जैसे क्षेत्रों में होने वाली तबाही पर लगाम लग सकेगी।

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