उत्तर प्रदेश से ज्यादा पानी आने के कारण बिहार में गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर से बढ़ गया है। इस खबर की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं: - मंगलवार को गंगा नदी पटना में गांधी घाट और हाथीदह के पास खतरे के निशान को पार कर गई है। - मुंगेर, सुल्तानगंज, भागलपुर और कहलगांव में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। - जल संसाधन विभाग के अनुसार पानी बढ़ रहा है लेकिन स्थिति बहुत भयानक बाढ़ जैसी नहीं होगी। - केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक कई जगहों पर जलस्तर में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। - साहिबगंज में तटबंध कटने से रेल यातायात बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है।
मंगलवार को गंगा नदी पटना के
गांधी घाट पर खतरे के निशान से 41 सेमी ऊपर और
हाथीदह में 01 सेमी ऊपर दर्ज की गई। इसके कारण मुंगेर, सुल्तानगंज, भागलपुर और कहलगांव के निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ आने का डर पैदा हो गया है। जल संसाधन विभाग का कहना है कि जलस्तर भले ही बढ़ रहा है, लेकिन यह बहुत भयानक बाढ़ के स्तर तक नहीं पहुंचेगा। विभाग के इंजीनियरों ने बताया कि वर्तमान स्तर मुंगेर में खतरे के निशान से 1.42 मीटर नीचे, भागलपुर में 1.29 मीटर नीचे और कहलगांव में 34 सेमी नीचे है। इसका मतलब है कि एक मीटर की बढ़ोतरी होने पर भी पानी खतरे के निशान से नीचे ही रहेगा। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद में 15 सेमी, वाराणसी में 79 सेमी, बक्सर में 86 सेमी, दीघा में 61 सेमी, गांधी घाट में 57 सेमी, हाथीदह में 35 सेमी, मुंगेर में 24 सेमी, भागलपुर में 15 सेमी और कहलगांव में 03 सेमी पानी बढ़ा है। वहीं विजय घाट पुल के पास कोसी नदी 31.34 मीटर दर्ज की गई, जो 31 मीटर के खतरे के निशान से 34 सेमी ऊपर है। बुधवार को कहलगांव में 17 सेमी और पानी बढ़ने की उम्मीद है।
साहिबगंज में तटबंध टूटने की वजह से
रेल सेवाओं में भारी बाधा आई है। डाउन लाइन पर यात्री और मालगाड़ी दोनों की आवाजाही बंद है। मंगलवार को चार ट्रेनें रद्द कर दी गईं और छह अन्य ट्रेनों के रास्ते बदलकर उन्हें भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट, जमालपुर-मुंगेर-कटिहार और किउल-झाझा-खानहा के रास्ते चलाया गया। इसके अलावा एक पैसेंजर ट्रेन और एक एक्सप्रेस ट्रेन को साहिबगंज में ही रोक दिया गया। बुधवार को भी रेल सेवाओं में ऐसी ही परेशानी आने की आशंका है। सुल्तानगंज और पीरपैंती में पानी निचले इलाकों में घुसने लगा है, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने
हाई अलर्ट जारी कर दिया है। केंद्रीय जल आयोग और जल संसाधन विभाग ने अगले 3 से 4 दिनों में जलस्तर में एक मीटर और बढ़ोतरी होने की भविष्यवाणी की है। जिला परिषद सदस्य आशा जायसवाल ने बताया कि पानी के इस तरह दोबारा बढ़ने से पशुपालकों और किसानों के सामने बड़ी मुसीबत आ गई है। दियारा और निचले इलाकों की चारागाह जमीन डूब चुकी है, जिससे मवेशियों के लिए चारे की कमी हो गई है और लोगों को अपने पशुओं को राष्ट्रीय राजमार्ग 80 के पास ऊंची जगहों पर ले जाना पड़ रहा है। जिला प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों से सतर्क रहने को कहा है और सभी संबंधित अंचल अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।