गंगा का बढ़ता पानी खतरनाक, बिहार में ट्रेनें हुईं धीमी

बिहार में रविवार, 6 सितंबर 2026 को गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से रेल परिचालन पर बहुत असर पड़ा है। इस खबर की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
* पटना में गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर तक पहुंचा, जिसने 2016 का पुराना रिकॉर्ड तोड़ा।
* साहिबगंज-भागलपुर-जमालपुर रेल खंड पर कई पुलों के गर्डर तक पानी पहुंचा।
* सुरक्षा को देखते हुए ट्रेनों की रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटा की गई।
* बाढ़ के कारण पूरे राज्य में 12 जिलों के करीब 2.24 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं।
मंत्री ने दी जानकारी और रेलवे हाई अलर्ट पर
बिहार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि पटना में गंगा नदी का जलस्तर 50.58 मीटर तक पहुंच गया है, जो 2016 के पिछले रिकॉर्ड से ज्यादा है। गांधी घाट, पंडारकर, दानापुर और बांका घाट पर जलस्तर स्थिर हो गया है, लेकिन वे अभी भी पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से ऊपर बने हुए हैं। पूर्वी रेलवे प्रशासन ने अपने नेटवर्क को हाई अलर्ट पर रखा है और ट्रैक के कटने के खतरे तथा पुलों की सुरक्षा को संभालने के लिए 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
भागलपुर और साहिबगंज रेल खंड पर ट्रेनों की रफ्तार घटी
साहिबगंज-भागलपुर-जमालपुर रेल खंड पर, कहलगांव-सबौर और सुल्तानगंज-रतनपुर मार्गों पर कई पुलों के गर्डर तक पानी पहुंच गया है। इसके परिणामस्वरूप, ट्रेनों की गति को घटाकर 30 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया गया है। खासतौर पर कल्याणपुर और रतनपुर के बीच की गति को 100-110 किमी/घंटा से घटाकर 20-30 किमी/घंटा कर दिया गया है।
पटना-गया रेल खंड पर ट्रेनें रद्द और डायवर्ट
पटना-गया रेल खंड पर पुनपुन और परसा बाजार स्टेशनों के बीच पुल संख्या 21 पर पानी बढ़ने के कारण डाउन लाइन पर परिचालन बंद कर दिया गया। अधिकारियों ने 6 सितंबर के लिए 10 MEMU ट्रेनों को रद्द कर दिया है, जिनके नंबर हैं: 63242, 63244, 63245, 63247, 63248, 63251, 63256, 63274, 63250 और 63253। इसके अलावा, 18626 हटिया-पूर्णिया कोर्ट एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनों का मार्ग बदला गया है।
भागलपुर में कटाव और राहत कार्य
भागलपुर में काजीपुर-राघोपुर तटबंध का कटाव बढ़कर 400 मीटर हो गया है। भागलपुर के अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) कुंदन कुमार ने बताया कि अधिकारियों ने रेलवे तटबंध की रक्षा के लिए तीन बड़े मालवाहक जहाजों को तैनात किया है। पूरे राज्य में, 12 जिलों के लगभग 22.42 मिलियन (2.24 करोड़) लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। सरकार वर्तमान में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की 37 टीमों के समर्थन से 190 सामुदायिक रसोई और राहत शिविर चला रही है। इंजीनियरों को निर्देश दिया गया है कि वे लगातार सतर्क रहें और आगे आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए मशीनों को तैयार रखें।